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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को फॉर्म-16 भेजना शुरू कर दिया है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये फॉर्म है क्या और कैसे ये आपके काम आता है?

क्या है फॉर्म 16?

कंपनी फॉर्म 16 के जरिये यह प्रूफ देती है कि आपकी सैलरी में जो टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) बनता था, वह काटने के बाद आयकर विभाग के पास जमा कर दिया गया है। इस फॉर्म में वो सारी जानकारियां रहतीं हैं जिसे आप आयकर रिटर्न भरने के टाइम यूज़ कर सकें।

 

फॉर्म 16 का पार्ट A:

फॉर्म 16 के पार्ट “A”  में आप और आपकी कंपनी से जुड़ी जानकारी के साथ ही काटे गए टैक्स की जानकारी होती है। इसमें इम्प्लॉयर का नाम, पता, TAN, PAN नंबर, PAN नंबर शामिल होता है। इसके अलावा इसमें हर तिमाही में कंपनी की तरफ से काटे गए टैक्स की भी जानकारी होती है। ये इम्प्लॉयर की तरफ से सर्ट‍िफाई किया गया होता है।

फॉर्म 16 का पार्ट B:

फॉर्म के पार्ट “B” में आपकी सैलरी और टैक्स छूट को लेकर जानकारी होती है। इसमें आपको आपकी सैलरी का ब्रेकअप, इनकम टैक्स एक्ट के तहत मिल रहा टैक्स छूट और सेक्शन 89 के तहत आपको मिल रही राहत की जानकारी शामिल होती है।

 

सेक्शन 89...

अगर आप ने कंपनी से एडवांस में सैलरी ली है या फिर एरियर्स के तौर पर आपको आपके वेतन का कुछ हिस्सा मिला है, तो इस पर आपको इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 89 के तहत टैक्स छूट दिए जाने का प्रावधान है।

फॉर्म 16 का इस्तेमाल:

फार्म 16 की मदद से आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न आसानी से भर सकते हैं। इसमें वह सब जानकारी होती है, जो आपको आयकर रिटर्न में देनी पड़ती है।

 

अगर आपको नहीं आया फॉर्म 16:

ज्यादातर कंपनियां अपने हर कर्मचारी को फॉर्म 16 जारी करती हैं, लेकिन अगर आपको फॉर्म 16 नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनियों उन लोगों को ही फॉर्म 16 भेजने को बाध्य हैं, जिनकी टैक्सेबल इनकम है।

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