Home National News Hc Judge Will Appear In Sc To Argue Against Collegiums Transfer Move

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अपने केस की पैरवी करेंगे हाईकोर्ट के जज

National | Last Updated : Jun 21, 2017 01:00 AM IST

  • पहले कभी न हुआ ऐसा: पेश होगा हाई कोर्ट का जज
  • ट्रांसफर किए जाने को लेकर कोलीजियम आदेश पर खफा

   
Hc judge will appear in sc to argue against collegiums transfer move


दि राइजिंग न्‍यूज

09 जनवरी, नई दिल्‍ली।

खुद को ट्रांसफर किए जाने को लेकर कोलीजियम जनादेश के खिलाफ एक हाई कोर्ट का जज अगले महीने खुद सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेगा। जज ने अपने इस फैसले के बारे में सुप्रीम कोर्ट को लिखा है। हाई कोर्ट ने जज को चेन्नै में उसका बंगला खाली करने का आदेश दिया है ताकि नए नियुक्त हुए जजों को वह अलॉट किया जा सके। इसके अलावा हाई कोर्ट ने जज से कहा है कि वह उन 12 फाइलों को लौटाएं जो कथित रूप से उसके कब्जे में है।

21 दिसंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस करनन ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को खत लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद शीर्ष अदालत में पेश होने की इच्छा जताई थी। वह खुद को मद्रास हाई कोर्ट से ट्रांसफर किए जाने के कलीजियम प्रपोजल के खिलाफ अपना पक्ष रखना चाहते हैं। यह सिफारिश पिछले फरवरी में की गई थी और जज द्वारा अब तक यह स्वीकार नहीं की गई है। राष्ट्रपति ने उनके नाम का वॉरंट जारी किया था और एक डेडलाइन रख दी थी,तब उन्होंने मार्च 2016 में कलकत्ता हाई कोर्ट जॉइन किया था।

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पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम ने जस्टिस करनन के ट्रांसफर की सिफारिश की थी, लेकिन उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर द्वारा जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर पर खुद स्टे लगा दिया था। जस्टिस करनन ने अपने ट्रांसफर के बारे में पूर्व सीजेआई से भी जवाब मांगा था और उनसे उनके न्यायिक अधिकार में दखल न देने को कहा था।

इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार जनरल के जरिए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की, जिसमें मांग की गई कि जजों को एेसे आदेश देने से रोका जाए। इसके बाद 15 फरवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस करनन पर किसी भी तरह का न्यायिक आदेश देने पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने उनसे कभी न्यायिक और प्रशासनिक कामों के अधिकार भी वापस ले लिए, लेकिन उन्हें हाई कोर्ट की याचिका के खिलाफ पैरवी करने की इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ दिनों बाद जस्टिस करनन ने पूर्व सीजेआई को एक खत लिखा, जिसमें उन्होंने उन पर मानसिक संतुलन खोने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी जाति के कारण उनसे भेदभाव किया जा रहा है।


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