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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

16 दिसम्बर 1971, ये तारीख देश के इतिहास में विजय दिवस के रूप में जानी जाती है। 13 दिनों तक चले युद्ध में भारत ने पाकिस्तान शिकस्त दी थी जिसमें 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने समर्पण कर दिया। इस युद्ध में 3843 लोगों भारत और बांग्लादेश के सैनिक शहीद हुए वहीं 9000 पाकिस्तान सैनिक मारे गए थे।

क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस?

 

3 दिसम्बर को इंदिरा गांधी ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए बताया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने भारत के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलें कर दिए हैं और भारत इन सभी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देगा। इंदिरा की ये लड़ाई ना केवल देश के रक्षा के लिए शस्त्र उठाने जैसी थी बल्कि मानवाधिकार की रक्षा के लिए भी एक कोशिश थी।

 

आज का बांग्लादेश तब पूर्वी पाकिस्तान था और पाकिस्तान ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। ऐसे में भारत ने तय किया कि वो बांग्लादेश का साथ देगा और पाकिस्तान के अत्याचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बना रहा था।

अमेरिका पाकिस्तान का साथ दे रहा था लेकिन भारत ने इस रवैये के आगे घुटने नहीं टेके। फील्ड मार्शल मानेकशॉ के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को मजबूर कर दिया था। वहीं जगजीत सिंह अरोड़ा भारतीय सेना के कमांडर थे। साहस और युद्ध कौशल का परिचय देते हुए अरोड़ा ने पाकिस्तानी सेना को समर्पण के लिए मजबूर कर दिया था।

 

ढाका में उस समय तकरीबन 30000 पाकिस्तानी सैनिक मौजूद थे और लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह के पास करीब 4000 सैनिक ही थे। लेकिन दूसरी टुकड़ियों के पहुंचने से पहले ही लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी से मिलने पहुंचे और उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उन्हें आत्मसमर्पण के लिए बाध्य कर दिया और इस तरह पूरी पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दिन को ही विजय दिवस की तरह मनाया जाता है।

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