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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

वह दौर, जब महिलाओं को अपनी बात तक कहने का हक नहीं था, उस समय कोर्नेलिया सोराबजी ने समाज को सुधारने का जिम्‍मा उठाया। महिलाओं और नाबालिगों के अधिकारों के लिए लड़ीं। गूगल आज पहली महिला बैरिस्‍टर कोर्नेलिया सोराबजी का 151वां जन्‍मदिन मना रहा है। बुधवार का डूडल उन्‍हीं को समर्पित है।  कॉर्नेलिया सोराबजी देश की पहली महिला हैं जिन्होंने बॉम्‍बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट किया और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में लॉ की डिग्री हासिल की।

 

नासिक की पारसी परिवार में जन्मी कार्नेलिया का जन्म 1866 में 15 नवंबर को हुआ था। समाज सुधारक के रूप में सोराबजी ने महिलाओं के लिए कई दरवाजे खोले साथ ही महिलाओं और नाबालिगों के अधिकारों के लिए समाज में नए सुधार करवाए। सोशल रिफॉर्म तो कार्नेलिया के खून में था। उनकी मां फ्रांसिना फोर्ड महिला शिक्षा की पक्षधर थीं, उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए कई स्कूल भी खोले। कॉर्नेलिया कुल छह भाई बहन थे उनमें वो अकेली बहन थीं।

कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई

 

वैसे तो कॉर्नेलिया की शुरुआती शिक्षा दीक्षा घर में ही हुई थी। जब वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंची तो उनकी पढ़ाई का काफी विरोध किया गया था। विरोधी थे तो समर्थक भी थे उनके। उनकी पढ़ाई के लिए ब्रिटेन के फ्लोंरेस नाइटेंगल ने भी फंड दिया था। 1892 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के समरविले कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की।

 

सोराबजी के लिए विरोध का स्वर इतना प्रखर था कि उन्हें कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई क्‍योंकि वह एक महिला थीं। उन्होंने अपने अधिकार के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और 1904 में बंगाल कोर्ट में लेडी असिस्टेंट के रुप में ज्वानइ किया और फिर उन्होंने बिहार, बंगाल, ओडिशा और असम में भी काम किया है।

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