Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड ने दिवालिया नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इससे लाखों खरीदारों को राहत मिलने वाली है। बोर्ड द्वारा बनाए गए नए नियमों के अनुसार, अब कोई भी कंपनी को तभी दिवालिया घोषित किया जा सकेगा, जब वो इस बात का प्लान दे देगी कि उसने सभी स्टेकहोल्डर का ध्यान रखा है।

आम्रपाली, जेपी के बायर्स को मिलेगा फायदा

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड द्वारा नियमों में बदलाव करने से सबसे ज्यादा फायदा उन होम बायर्स को होगा, जिन्होंने जेपी इंफ्राटेक व आम्रपाली जैसी डिफॉल्टर कंपनियों से फ्लैट खरीदा हुआ है। पिछले हफ्ते बोर्ड द्वारा इन नियमों को नोटिफाई किया गया था।

 

गौरतलब है कि बैंक केवल अपने हितों को देखते हुए ही कंपनी लॉ बोर्ड में किसी भी लोन डिफॉल्टर कंपनी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बैंक अक्सर उस कमेटी का हिस्सा होते हैं, जो कंपनी के दिवालिया घोषित करने के लिए बनाई जाती है।

बायर्स के हितों का भी रखना होगा ध्यान

 

अब बैंकों को ऐसी रियल इस्टेट कंपनियों में फंसे बायर्स के हितों का ध्यान रखना होगा। फिलहाल पिछले साल बनाए गए नियमों के अनुसार किसी भी लोन डिफॉल्टर कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया को 6 महीने में पूरा करना होगा।

 

इसमें केवल तीन महीनों की बढ़ोतरी और हो सकती है। इसके लिए एक इनसॉल्वेंसी रिजॉलूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) को नियुक्त किया जाएगा जो कंपनी के ऑपरेशन का चार्ज लेगा और प्लान तैयार करेगा।

सुप्रीम कोर्ट भी बायर्स के पक्ष में

 

बिल्डरों को पूरा पैसा चुकाने के बावजूद फ्लैट का कब्जा पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर निवेशकों की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहल की है। उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसे निवेशकों को फ्लैट का कब्जा या धन वापस दिलाकर रहेगी।

 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोएडा में जेपी विश टाउन प्रोजेक्ट के 40 फ्लैट खरीदारों की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही थी।

इन खरीदारों ने दिवालिया संहिता, 2016 के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसे मामलों में और मुकदमे दायर होने देना नहीं चाहती है। पीठ ने कहा कि हम फ्लैट खरीदारों की मदद करना चाहते हैं, न कि और मुकदमे। पीठ में न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी थे।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम चाहते हैं कि खरीदारों को हर हाल में फ्लैट मिल जाएं।" पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील राशिद सईद से कहा कि वह जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया कानून से संबंधित मामले में पहले ही एमिकस क्यूरी के तौर पर वकील शेखर नेफाडे की नियुक्ति कर चुकी है।

लिहाजा सईद दिवालिया मामले की प्रक्रिया में एक पक्षकार के तौर पर आवेदन कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ को बताया कि इन खरीदारों ने 2013 में फ्लैट बुक कराए थे और उन्हें पिछले साल ही कब्जा मिलने वाला था। लेकिन मोटी रकम चुकाने के बावजूद उन्हें अब तक फ्लैटों का कब्जा नहीं मिल पाया है।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Loading...

Public Poll