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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार अब निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर नकेल कसने के मूड में है। इसके लिए सरकार अब विनियमन लाने की योजना बना रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी साल इस तरह का एक कानून बनाया है जिसे कामयाब बताया जा रहा है। इस कानून के तहत अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूलों सहित निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित किया गया है।

 

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक केंद्र सरकार सभी पक्षों से सलाह मशवरा कर रही है और इस फैसले को लागू करने से पहले सर्वसम्मति बनाने की कोशिश कर रही है। अधिकारी ने कहा, "फीस को नियंत्रित करना यह राज्य सरकारों का काम है क्योंकि स्कूल वहां पंजीकृत हैं। केंद्र सरकार इस पर आंतरिक चर्चा कर रही है। केंद्र आम सहमति के लिए राज्यों और अन्य पक्षों से संपर्क कर रही है।"

इस साल अप्रैल में यूपी सरकार ने आश्चर्यजनक तौर पर फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर नकेल कसने के लिए “स्व-वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालयों (फीस विनियमन) बिल 2018” के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी थी। कानून निजी स्कूलों को आठ प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाने से रोकता है।

 

यूपी सरकार ने अध्यादेश लाने का फैसला किया क्योंकि उस समय विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा था। यह कानून केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआइएससीई) से संबद्ध अल्पसंख्यक संस्थानों सहित सभी निजी स्कूलों और यूपी बोर्ड स्कूलों पर लागू होगा।

यूपी सरकार का अध्यादेश स्कूलों न सिर्फ मनमानी शुल्क बढ़ाने से रोकता है बल्कि उन्हें किसी भी तरह का कैपिटेशन फीस भी लेने की इजाजत नहीं देता है। केंद्र इसके अलावा "हर साल एडमिशन फीस लेने और स्कूल ड्रेस बदलने" जैसे नियमों पर भी रोक लागने पर विचार कर रही है।

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