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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

ग्रामीण इलाकों में नकदी की किल्लत दूर करने की सरकार की तमाम कोशिशों से जनता को फायदा नहीं मिल पा रहा है। स्थिति तो यह है कि नोएडा-गाजियाबाद को छोड़ दें तो मेरठ मंडल के शामली, बड़ौत, बागपत तथा आसपास के गांव-कस्बों में अभी भी नकदी की किल्लत है। सिर्फ यहीं नहीं, गोरखपुर, गाजीपुर, गोंडा आदि जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में तो स्थिति ज्यादा ही खराब है।

 

इन इलाकों में एटीएम सूने हैं या उनके शटर डाउन हैं, जबकि बैंकों में पर्याप्त नकदी नहीं है। नकदी की आस में ग्राहक दिन-दिन भर बैंक की शाखा में बैठे रहते हैं कि कोई ग्राहक जमा करने आए तो उन्हें नकदी मिल जाए।

आपको याद होगा कि बीते अप्रैल में भी उत्तर भारत के कई राज्यों में नकदी के लिए नोटबंदी के दिनों का नजारा दिखने लगा था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप करके नोटों की छपाई बढ़ाने का आदेश दिया था। इसके बाद केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा था कि कुछ ही दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन 20 दिन बीतने के बाद भी उत्तर प्रदेश के अधिकतर इलाकों में नकदी की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ है।

 

गोरखपुर, गोंडा, गाजीपुर, सब जगह एक से हालात

गोरखपुर के पास एसबीआई की एक ग्रामीण शाखा में तैनात एक अधिकारी का कहना है कि उनके यहां दस दिन पर दस लाख रुपये की आपूर्ति आती है और कहा जाता है कि इसे लंबा चलाना है।

मतलब कि अगले दस दिनों तक नहीं होगी नकदी की आपूर्ति। ऐसे में ग्राहकों को दस-बीस हजार रुपये देकर काम चलाना पड़ता है। कोई ग्राहक अड़ जाता है कि उन्हें पैसे चाहिए ही चाहिए तो उन्हें शाखा में ही बैठा लेते हैं ताकि यदि कोई ग्राहक पैसे जमा करने आए तो वह नकदी उन्हें दे दी जाए। जहां तक ग्रामीण इलाकों के एटीएम की बात है तो वे शो-पीस बने हुए हैं। गोंडा और गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों में भी यही हालात हैं।

 

सरकारी घोषणा का जमीन पर नहीं दिखा है असर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ करेंसी चेस्ट से जुड़े एसबीआई की एक कस्बाई शाखा के प्रबंधक का कहना है कि यदि ठीक से भुगतान किया जाए तो उनके यहां दिनभर में ढाई से तीन करोड़ रुपये की निकासी होती है। लेकिन नकदी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने से 50 हजार रुपये से ज्यादा की नकदी किसी एक ग्राहक को दिया ही नहीं जाता। हां, शादी-ब्याह के घरों पर कुछ विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि उनका भी काम निकल जाए।

नए नोटों की आपूर्ति नहीं होने से सूने हैं एटीएम

एक सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए नोटों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से एटीएम सूने हैं। उनके मुताबिक शाखा में तो 100 रुपये के पुराने, गंदे नोटों से काम चल जाता है लेकिन ऐसे नोट एटीएम में नहीं चल पाते।

 

एटीएम में दो हजार रुपये के नोट के लिए कैसेट लगाया गया है, लेकिन दो हजार रुपये के नोट आ ही नहीं रहे हैं। पांच सौ रुपये के नोट भी नहीं ही आ रहे हैं। बचे 200 रुपये के नोट, जिसके हिसाब से एटीएम का कैलिबरेशन नहीं हो पाया है।

12 मई तक है लगन

इस साल 16 मई से मलमास शुरू हो रहा है, मतलब उस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा। इसलिए 12 मई तक ही शादी-ब्याह के लिए लगन है। तभी तक शादियां होंगी। इसलिए लोग जल्दी में हैं क्योंकि मलमास खत्म होने के बाद बरसात का मौसम शुरू हो जाएगा। इसलिए ग्रामीण इलाके में लोग शादी की तिथि नहीं रखते क्योंकि बरसात में काफी असुविधा होगी।

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