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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

भारत और अमेरिका के रिश्तों में धीरे-धीरे खटास बढ़ रही है। अमरीका द्वारा शुरू किया गया ट्रेड वार अब दूसरे मोड़ पर पहुंच चुका है। यही नहीं अमेरिका ने भारत के साथ होने वाली पहली उच्च स्तरीय “टू प्लस टू” बैठक को भी टाल दिया है। यह वार्ता छह जुलाई को वाशिंगटन में होने वाली थी। जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भाग लेने वालीं थी। भले ही यह वार्ता को अमेरिका ने टाल दिया और माफी भी मांगी ली है लेकिन इससे यह साबित हो गया है कि दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से कड़वाहट फैल रही है। और यह साफ हो गया है कि ट्रंप की लिस्ट में भारत का स्थान महत्वपूर्ण बिलकुल नहीं है। 

 

बता दें कि दोनों देशों में व्यापार और कई तरह की संधी को लेकर शुरू होने वाली इस वार्ता को लेकर बात जून 2017 में ही हुई थी। इस अहम बैठक को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई थी जो आज तक शुरू नहीं हो पाई है।

क्यों महत्पूर्ण थी ये बैठक

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि पहली बार भारतीय पक्ष का नेतृत्व दो महिला कैबिनेट मंत्री करने जा रही थीं और इस बैठक में सामरिक और कूटनीतिक विषयों पर नए सिरे से समीक्षा की जानी थी। यह पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने यह बैठक टाली है। इससे पहले मार्च में भी यह बैठक आखिरी समय में टाल दी गई थी। बुधवार को बैठक टाले जाने के विषय में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने सुषमा स्वराज से बात की है और वार्ता टालने के लिए खेद व्यक्त किा है। रवीश कुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने जल्द से जल्द इस बैठक के लिए फिर से तारीख तय करने पर भी बात की है।


क्या है टू प्लस टू वार्ता

भारत और अमेरिका के बीच यह विशेष वार्ता (टू प्लस टू) है जिसमें दोनों देशों के बीच कारोबारी मुद्दों पर बात होनी थी। इस बैठक में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं। जिसमें दोनों देशों के रणनीतिक, कूटनीतिक और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होनी है।

टू प्लस टू वार्ता दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार के लिए अहम मानी जा रही है। इस बैठक का अहम मकसद दोनों पक्षों के सुरक्षा व रणनीतिक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर आपसी हितों पर चर्चा करना भी है। इस वार्ता की शुरुआत राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी जिसमें भारत के साथ कूटनीतिक व वाणिज्यिक वार्ता होती थी जिसमें दोनों देशों के विदेश, रक्षा, वित्त, वाणिज्य व ऊर्जा मंत्री शामिल होते थे।

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