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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

हजरतगंज स्थित कैथेड्रल स्कूल में बच्चे लाने वाली एक मारुति वैन की जांच की गई तो उसमें वैन के दरवाजे पर चालक का नाम रुपेश कुमार दर्ज था। वाहन को जब्त किया गया। उसके बाद वहां एक दूसरी बस की जांच की गई। इस बस पर किसी दूसरे कॉलेज का नाम लिखा, लेकिन यहां पर चालक का नाम रुपेश कुमार ही था। यही नहीं कॉलेज के गेट पर खड़ी एक अन्य बस में इसी चालक नाम दर्ज था। जब इसकी पड़ताल की गई तो स्कूली वाहन चलवाने वाले ठेकेदार एक सरदार जी सामने आए। बताया कि फिटनेस ग्राउंड पर रुपेश कुमार ही वाहन लेकर जाते हैं, इस कारण उनका नाम दर्ज है। जबकि पकड़े गए वाहन पर कल्लू व अन्य नाम के ड्राइवर मिले।

 

 

दरअसल, यह सारा खेल एक तरफा नहीं है बल्कि इसमें फिटनेस ग्राउंड पर चल रहे गोरखधंधे का खुलासा हो गया। एक ही स्कूल में दर्जनों वाहन मारुति वैन व बस ऐसी थीं, जिनमें स्कूल का नाम तक नहीं अंकित है। बावजूद उसके उनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र मिले। जबकि उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी गाइड लाइन के मुताबिक स्कूल परमिट के वाहन पर चालक का नाम, लाइसेंस नंबर व उसकी वैद्यता अंकित होना अनिवार्य है। यही नहीं, चालक के पास कम से कम पांच साल तक व्यावसायिक वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी है, लेकिन अपनी सुविधा में मसरूफ परिवहन विभाग की जांच तक नहीं करता है।

 

 

मंगलवार सुबह परिवहन विभाग की जांच में तीन स्कूली बस खटारा मिलीं। मारुति वैन में सीएनजी सिलेंडर के ऊपर पिछली सीट मिली, जबकि ड्राइवर की सीट के पीछे वाली सीट को लोहे के एंगल का बना दिया। उनके बीच बेंच लगाई जाती थी, जबकि वाहन में फिटनेस प्रमाणपत्र भी था। इससे सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर वाहन को फिटनेस कैसे दी गई। केवल इतना ही नहीं, अपर परिवहन आयुक्त वीके सिंह द्वारा वाहनों के अनुबंध पत्र जांचने के आदेश पर भी कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, अधिकारियों ने इस संबंध में आदेश ही न मिलने की बात कहीं। लिहाजा प्रवर्तन अधिकारी उससे भी बचते दिखे।

 

 

अनफिट मिली फिटनेस प्राप्त स्कूल वाहन

परिवहन विभाग की जांच में कैथेड्रल स्कूल पर तीन वाहनों को खटारा हालत में पकड़ा गया। यूपी 32 एएन 6632 और यूपी 32 एएन 6572 बस तथा एक मारुति वैन यूपी 32 बीएच 8514 खटारा हालत में थीं। एक बस में सीटें फटी थीं। ड्राइवर के स्टेरिंग की एकदम टूटा-फूटा था। इन वाहनों को जब्त कर उनकी फिटनेस रद्द करने की सिफारिश की गई है। खास बात यह है कि प्रवर्तन दल वाहनों की हालत देखकर उसे फिट करार दिए जाने पर सवाल खड़ा कर दिया, जबकि वाहनों को फिटनेस देने वाले संभागीय महानिरीक्षक (आरआइ) आरपी सिंह ने बताया कि वाहनों की फिटनेस करीब साल भर पुराना है। ऐसे में वाहन बीच में ही खराब हुए होंगे। हालांकि दो वाहनों पर स्कूलों के नाम भी नहीं थे, जिसे उन्‍होंने अनदेखा करने की बात स्वीकार की।

 

 

बिना अनुबंध अब टैक्स में छूट नहीं

स्कूल परमिट वाली गाड़ियों को अब टैक्स में छूट केवल उस समय ही मिलेगी जब वह संबंधित स्कूल का अनुबंध पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए सभी स्कूल परमिटधारी निजी वाहनों को नोटिस जारी किया जा रहा है। इसके अलावा फिटनेस व टैक्स जमा करते वक्त भी अनुबंध पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। दरअसल, स्कूलों में चल रही तमाम मारुति वैन तथा बस व अन्य वाहनों फर्जीवाड़ा करके स्कूल परमिट हासिल कर लेते हैं। उसके बाद विभागीय कर्मचारियों व दलालों से मिलकर बिना अनुबंध दिखाए आधा टैक्स जमा कराते हैं।

खास बात यह है कि दफ्तर में सक्रिय दलाल अनुबंध पत्र भी गायब कर देते हैं। इसके लिए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी आदेश दिया गया है कि वे किसी वाहन के स्कूल परमिट के आवेदन के वक्त ही संबंधित स्कूल से सत्यापित कराएं कि वाहन उनके यहां कांट्रैक्ट पर है या नहीं। अगर नहीं है तो उसे स्कूल परमिट नहीं दिया जाएगा।

फिटनेस ग्राउंड पर होने वाली कई शिथिलताएं सामने आई हैं। इसके संबंधित आरआइ को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्कूल वाहन के परमिट से लेकर टैक्स तक किसी भी कार्य के लिए अनुबंध पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। एक चालक का नाम कई वाहनों पर लिखे होने की बात सामने आई है। इसके लिए चालक का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। इसके साथ वाहन स्वामी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अशोक कुमार

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन)

   

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