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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

सूबे के मुख्‍यमंत्री से लेकर परिवहन मंत्री ने या‍त्री सुविधाओं को लेकर डग्‍गामार वाहनों पर लगाम लगाने का दम भर रहे हैं। हर भाषण में अवैध संचालन पर लगाम लगाने का दावा किया जा रहा है लेकिन जबकि हकीकत में अवैध डग्गामार वाहन अब बस अड्डों के सामने से ही संचालित हो रहे हैं। राजधानी ही नहीं, कौशाम्बी, गाजियाबाद में भी इसी तरह का संचालन हो रहा है। सोमवार को रोडवेज अधिकारियों की जांच में एक बार फिर इसकी कलई खुल गई।

 

अभियान के दौरान रोडवेज एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों ने दिल्‍ली से लेकर लखनऊ और प्रतापगढ़ - मुजफ्फरनगर सवारी ले कर जा रही बसों को जांच के दौरान रोक कर सीज कर दिया गया। जांच में शामिल सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत दीक्षित ने बताया कि बस चालकों ने बताया कि वे कौशांबी बस अड्डे के सामने स्थित स्टैंड से सवारी लेकर चले थे। बस चालकों के बयान के बाद रोडवेज के भ्रष्ट अधिकारियों की भी पोल खुल गई है।

हर बस अड्डे पर चल रहा खेल

अवैध डग्गामार बसों के संचालन का खेल राजधानी से लेकर फैजाबाद, गोंडा, गाजियाबाद, कौशांबी आदि सभी शहरों में चल रहा है। राजधानी में ही अवध डिपो के सामने से ही डग्‍गामार वाहन संचालित हो रहे है। ऐसा नहीं, इसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं है लेकिन वे तमाम बहाने बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। शासन को पत्र भेजने का दम तो भरते हैं लेकिन पत्र की प्रति उनके पास नहीं मिलती। इसी तरह से परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी भी इन बस आपरेटरों से हर महीने से मोटी रकम वसूल रहे हैं। यही कारण है कि जांच केवल हाईवे या दूर दराज इलाकों में होती है। अन्यथा शहर के भीतर जांच की ही नहीं जाती है। इसके चलते सिटी स्टेशन, डालीगंज बांस मंडी, केकेसी मोड़, खदरा पुल तक विभिन्न रूटों की बसों के अड्डे बन गए हैं।

सात साल पहले लगी प्रभावी रोक

बसपा सरकार के शासन में डग्‍गामार बसों पर प्रभावी रोंक लगायी गयी थी। इस दौरान डग्‍गामार बसों के संचालन पर रोडवेज अधिकारियों एवं पुलिस पर कार्रवाई करने के आदेश दिये गये थे। रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि इस कडे कदम के चलते डग्‍गामार वाहनों पर प्रभावी रोक लगी थी।

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