Kajol Says SRK is Giving Me The Tips of Acting

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

कुशीनगर में स्कूली वाहनों की डेढ़ सौ फीसद चेकिंग। यानी पचास फीसद के करीब स्कूल वाहनों की दो बार चेकिंग। बावजूद इसके मंगलवार सुबह स्कूली बच्चे ले जा रही टाटा मैजिक हादसाग्रस्त हो गई। मैजिक में बच्चे भी निर्धारित संख्या से कहीं ज्यादा थे। छह से ज्यादा बच्चे घायल।

राजधानी लखनऊ में कागजों पर शत-प्रतिशत स्कूल वाहनों की जांच मगर मंगलवार सुबह चले अभियान में पचास से अधिक वाहन मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। किसी में फिटनेस नहीं तो किसी में सीएनजी लीकेज किट नहीं। आधा दर्जन गाड़ियों को सीज कर दिया गया, जबकि तीन दर्जन से अधिक चालान काटे गए।

 

 

दरअसल, यह है परिवहन विभाग के होनहार अधिकारियों के दावों की असलियत जो उनकी जांच ही जांच में खुल गई। शासन की आंखों में धूल झोंकने में माहिर परिवहन अधिकारियों ने प्रदेश भर में 94 फीसद स्कूली वाहनों की जांच करने का दावा तो कर दिया, लेकिन दो स्थानों की जांच रिपोर्ट से हकीकत सामने आ गई। अधिकारियों के इस गोरखधंधे पर रोक लगाने के मकसद से अब अभियान में अधिकारियों को जांच के बाद रिपोर्ट पर वाहन नंबर के साथ अपना नाम भी लिखना होगा। यह लिस्ट आरटीओ को दी जाएगी जिसमें कुछ वाहनों की जांच आरटीओ करेंगे।

 

 

आरटीओ द्वारा जांचे जाने वाले वाहनों की जांच फिर जोनल अधिकारी करेंगे और उनके द्वारा जांचे गए वाहनों को अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी चेक करेंगे। दरअसल इस व्यवस्था का मकसद जांच के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना है।

सोमवार को हुई परिवहन मंत्री की बैठक में फर्जी आंकड़ों को लेकर वाहनों की जांच पर कई स्तरीय चेक लगाए जाएंगे। इसके अलावा गलत जानकारी देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। अपर परिवहन आयुक्त बीके सिंह ने बताया कि इस बावत अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। साथ ही वाहनों की चेकिंग के साथ उसका नंबर तथा चेकिंग करने वाले अधिकारी के नाम के साथ लिस्ट बनाने को कहा गया है। ताकि उसकी जांच कराई जा सकें।

कई बार पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

परिवहन मुख्यालय और शासन को परिवहन अधिकारी कई बार गलत जानकारी देकर गुमराह कर चुके हैं। कई अधिकारी पकड़े भी गए, लेकिन कार्रवाई सिफर रही। पिछले दिनों हमीरपुर के एआरटीओ की रिपोर्ट संदिग्ध होने पर उसकी जानकारी आरटीओ (बांदा) से मांगी गई तो उन्होंने जानकारी से इंकार कर दिया। यही नहीं, इस बावत एआरटीओ से पूछा गया तो उन्होंने किसी कर्मचारी द्वारा स्टेटमेंट बनाकर फर्जी साइन द्वारा मुख्यालय भेजने की दलील दी। इस संबंध में आरटीओ बांदा को एआरटीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं।

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