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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सिटी बसों के रखरखाव के नाम पर सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी में हर महीने लाखों रुपये का घोटाला हो रहा है। इस बात की सत्यता गुरूवार रात बर्लिंग्टन चौराहे के नजदीक हुए हादसे के बाद दिखाई दे रही है। दरअसल जिस बस से हादसा हुआ, वह गुरुवार दोपहर ही वर्कशाप से बनकर निकली थी और उसे स्टेयरिंग प्रेशर लीक होने की शिकायत के चलते भेजा गया था। बस को दुरुस्त करने के बाद सड़क पर उतरवा दिया गया था। खास बात यह है कि ब्रेक फेल होने की वजह भी प्रेशर लीक होना माना जा रहा है। सेवा प्रबंधक सत्यनारायण के मुताबिक बस की मरम्मत क्लच प्लेट का प्रेशर लीक होने के मामले में की गई थी। खास बात यह है कि सिटी बसों में पिछले कई महीनों से रखरखाव व उपकरणों के नाम पर जमकर घोटाला चल रहा है।

कागजों पर महंगे ओरिजनल स्पेयर खरीदे जा रहे हैं जबकि लोकल व घटिया किस्म के स्पेयर लगाए जा रहे हैं। उधर, संविदा कर्मचारियों ने हादसाग्रस्त बस की टेकनिकल जांच कराने की मांग की है। कर्मचारियों के मुताबिक जांच भर से सारा खेल उजागर हो जाएगा।

दरअसल गुरुवार रात मार्ग संख्या 12 पर चलने वाली सिटी बस संख्या यूपी 32 डीएन 0848, का स्टेयरिंग फेल हो गया था। इसके बाद बस की चपेट में एक मारुति कार सहित कई लोग आ गए थे। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई गई थी। हादसे के बाद पुलिस सिटी बस के चालक राजू को पकड़ कर लोगों ने पुलिस के सिपुर्द कर दिया था। खास बात यह है कि शुक्रवार दोपहर चालक पुलिस के पास नहीं था। इंस्पेक्टर हुसैनगंज आनंद शुक्ला ने तो हादसे के चालक के फरार होने का दावा किया। दूसरी तरफ संविदा कर्मचारी यूनियन के सदस्यों ने चालक के गिरफ्तार होने की बात कही।

एमडी बदलते ही शुरु हुआ खेल

लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी में पूर्व प्रबंध निदेशक एआर रहमान के तबादले के बाद नए प्रबंध निदेशक आपिऱ सकलैन के पदभार संभालते ही रखरखाव के नाम पर खेल शुरू हो गया। कर्मचारियों का आरोप है कि बसों में स्पार्क प्लग, क्लच प्लेट, इंजन आयल, मोबिल आयल सहित तमाम सामान घटिया व लोकल लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि कागजों पर यह सारा सामान ओरिजनल दिखाकर खरीदा जाता है और इसकी आड़ लाखों रुपया अधिकारियों के बीच बंट रहा है। इसकी जांच किसी भी सिटी बस की टेक्निकल जांच करके की जा सकती है। तमाम बसें रखरखाव के अभाव में कंडम हो चुकी है। आलम यह है कि दुबग्गा डिपो में ही चालीस ज्यादा बसें आफ रुट यानी खड़ी है। इतनी ही बसें गोमतीनगर डिपो में मरम्मत के अभाव में खड़ी है। स्पेयर न होने की दलील देकर उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। दो दर्जन से ज्यादा बसें केवल टायर न बदले जाने के कारण खड़ी है।

 

 

सालों पुरानी बस और फिटनेस प्रमाणपत्र

आरटीओ दफ्तर में बसों के फिटनेस में कितना खेल हो रहा है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण राजधानी की सड़क पर दौड़ रही सिटी बसें हैं। अधिसंख्य बसों में बैक लाइट टूटी हैं। पिछले बंपर टेढ़ा मेढ़ा है और रिफ्लेक्टिंग टेप तक गायब है। आए दिन बसें सड़क पर खड़ी हो रही है लेकिन परिवहन विभाग ने इन सभी बसों को फिटनेस दे रखी है। इस बावत परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) आरपी कहते हैं कि बसों का निरीक्षण कर उनमें खामियां दूर कराई जाती हैं। फिटनेस प्रमाणपत्र एक साल के लिए दिया जाता है। प्रमाणपत्र निर्गत होने के बाद अगर बस में कोई दिक्कत आ रही है, उसे दूर कराना संबंधित संस्था का दायित्व है। अनफिट बस चलती मिले तो उस पर प्रवर्तन विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।

"बसों में ओरिजनल स्पेयर ही लगाए जा रहे हैं। घटिया–लोकल स्पेयर लगाए जाने के आरोप बेबुनियाद है। रही बात हादसे से पहले बस के ठीक होकर निकलने की तो उस वक्त गाड़ी का पूरा निरीक्षण किया गया था। बस के पास अप्रैल 2018 तक फिटनेस प्रमाणपत्र भी है।"

आरिफ सकलैन

एमडी सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी

 

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