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बीमार स्वास्थ्य सेवाएं और मंत्री का टीवी प्रेम

Lucknow | Last Updated : May 12, 2018 11:39 AM IST
  • डीजी हेल्थ को भेजी चिट्ठी आम होने से खुली पोल

  • सफाई से लेकर अस्पताल तक कमीशनखोरी-वसूली का खेल


Reality of Government Hospitals in Lucknow


दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

कहीं ठेले पर प्रसव तो कहीं पर बिना स्ट्रेजर कांधे पर अस्पताल पहुंचते मरीज। प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं अक्सर ही चर्चा में रहती हैं, लेकिन सवाल यह है कि कमी दूर क्यों नहीं होती? सरकार दावे भले तमाम करे, लेकिन हकीकत आखिर सामने आ गई। हकीकत खुली स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के सचिव द्वारा स्वास्थ्य निदेशक को भेजी गई चिट्ठी से। इस चिट्ठी में स्वास्थ्य मंत्री के घर पर तीन टीवी लगवाने के लिए स्वास्थ्य निदेशक को पत्र भेजा गया था।

चिट्ठी वायरल हो जाने से सरकार के कर्मठ और ईमानदार मंत्री जरूर सवालों के झंझावत में जूझते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि पूरे मामले में उनके सचिव ने ही गलती से चिट्ठी जारी करने की बात कही, लेकिन सवाल यह है कि तीन चिट्ठियां कैसे जारी की गईं। हालांकि, अब स्वास्थ्य निदेशक पद्माकर सिंह कोई टीवी लगवान जैसी बात से इंकार कर रहे तों सचिव तिलक राज इसे गलती करार दे मंत्री के बचाव में लगे हैं।

पूरा मामला सामने आने के बाद माननीयों की भूमिका को लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। दरअसल, यह किसी मंत्री पर लगा पहला आरोप नहीं है। इसके साथ ही आगरा में भारतीय जनता पार्टी विधायक जगन प्रसाद गर्ग द्वारा नगर निगम में चल रही कमीशन खोरी प्रतिशत की लिस्ट भी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। यहां पर पार्टी के विधायक ने सीधे तौर पर 27 फीसद कमीशन लिए जाने की बात कही है और इसकी चिट्ठी मुख्यमंत्री को भी प्रेषित कर दी है। पार्टी नेता द्वारा जारी इस वसूली लिस्ट के बाद अब सरकार में अंदर क्या चल रहा है, यह बात भी सामने आने लगी है।

हर विभाग में जबरदस्त लूट

प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस की हकीकत विभागों में साफ दिखाई देती है। स्कूली बच्चों के जूते–मोजे, बस्ते से लेकर स्वेटर तक का मामला अभी चल रहा है, जबकि शिक्षा मंत्री पर पार्टी के कार्यकर्ता नेता सवाल उठा रहे हैं। परिवहन विभाग में भी यह कहीं से कम नहीं है। विभाग में कई परिवहन सलाहकार तैनात हो गए हैं जो विभाग को समृद्ध करने का काम कर रहे हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी यह सलाह काफी कारगर दिखी थी। यहां पर मुख्यमंत्री के सामने भीड़ जुटाने के लिए काकोरी, रायबरेली व सीतापुर तक से बच्चे बुलाए गए।

यही नहीं परिवहन मंत्री कर्नाटक चुनाव में व्यस्तता के चलते एक बार भी नहीं आए। प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला भी नदारद रहीं। कुशीनगर में स्कूल वाहन के हादसाग्रस्त होने और 13 मासूमों की मौत के बाद मुख्यमंत्री के पहुंचने पर प्रमुख सचिव वहां पहुंची थीं। खास बात यह है कि प्रमुख सचिव और परिवहन मंत्री के न होने के कारण रस्म अदायगी में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने वाला विभाग अब इस सप्ताह के खर्च को तैयार करने में व्यस्त है। ताकि कम से कम कागजों पर बताया जा सकें कि लोगों को कितना जागरूक किया गया।



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