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दि राइजिंग न्‍यूज

अमित सिंह

लखनऊ।

 

नगर निगम की मानें तो सबसे ज्यादा प्रदूषण राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के आसपास ही रहता है। बात इसलिए भी सही लगती है कि प्रतिदिन सुबह कई टैंकर पानी यहां पर सड़क पर डाला जाता है। वह भी बेनागा। यह अलग बात है कि एक–दो दिन के अंतराल पर बापू भवन, बटलर पैलेस तथा जिलाधिकारी कार्यालय के आसपास पानी पड़ता है लेकिन वास्तव में ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में नगर निगम का छिड़काव फिलवक्त हुआ ही नहीं है।

 

 

अब जरा चौक क्षेत्र को देखें, यहां पर भूमिगत केबल डालने के लिए मुख्य मार्ग खुदा पड़ा है। कुछ स्थानों पर ट्रेंच बन गई है तो वहां सड़क न बनने के कारण गिट्टी–मिट्टी उड़ रही है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बावजूद आजतक वहां एक टैंकर पानी नहीं डाला गया। यही हाल अमीनाबाद, चारबाग, कैसरबाग, निशातगंज, भूतनाथ मार्केट का है।

 

 

 

नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण बताते हैं कि राजभवन–सीएम आवास के आसपास प्रतिदिन पानी डाला जाता है। बाकी स्थान पर अलग-अलग दिन पर पानी डाला जाता है लेकिन मंगलवार को किन-किन क्षेत्रों में पानी डाला गया, यह उन्हें नहीं मालूम था। इतना जरूर है कि प्रतिदिन करीब 15 टैंकर पानी डाला जा रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक एक टैंकर की कीमत करीब 1200 रुपये आती है यानी कि प्रतिदिन प्रदूषण के नाम पर 18 हजार रुपये पानी छिड़कने पर खर्च हो रहे हैं।

पर्यावरण अभियंता पकंज भूषण ने बताया कि- पानी का छिड़काव वैसे तो सभी इलाकों में करने का प्रयास किया जाता है। वीआइपी क्षेत्रों में पानी का नियमित छिड़काव करने का आदेश नगर आयुक्त उदय राज तथा मुख्य अभियंता मोहनजी पांडेय के यहां से हुआ है। इस कारण राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास व आसपास के वीआइपी क्षेत्रों में प्रतिदिन पानी डाला जा रहा है।

 

 

रात्रिकालीन सफाई में केवल कमाई

राजधानी की आबोहवा भले ही खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो गई है। धूल व धुएं के कारण राजधानी में हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई हो, लेकिन करीब तीन महीने में नगर रात्रिकालीन सफाई पर करीब 72 लाख रुपये खर्च कर चुका है। यह अलग बात है कि रात्रिकालीन सफाई का निरीक्षण कौन करता है, यह किसी को नहीं मालूम।

 

 

चौक से लेकर भूतनाथ तक करीब 28 क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई की जा रही है, जबकि चौक में ही प्रतिदिन सुबह चौक चौराहे से लेकर कोनेश्वर तिराहे तक कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। इसी तरह किसी हिस्से में रात्रिकालीन सफाई हो भी रही है तो वहां कूड़ा भी रात में जलाया जा रहा है लेकिन बंद कमरों में ठंड मनाने वाले अधिकारी सारी व्यवस्था चाक चौबंद होने का दावा करने से नहीं थकते।

 

 

 

गौरतलब है कि 28 बाजारों में 320 कर्मचारियों को सफाई के लिए लगाया गया है। रात्रिकालीन सफाई के निरीक्षण के लिए कभी कोई जोनल अधिकारी नहीं निकलता। नतीजा यह रहता है कि ठेकेदार व सफाई निरीक्षक आराम से सफाई के नाम पर कमाई कर रहे हैं।

 

 

 

इन बाजारों में होती है सफाई

हजरतगंज, चौक, चारबाग, भूतनाथ, निशातगंज, लेखराज, मुंशीपुलिया, खजाना मार्केट, पीजीआई, तेलीबाग बंगला बाजार, चिनहीट मिठाई लाल चौराहा सहित अन्‍य बाजारों की होती है सफाई।

 

 

सिर्फ वीआइपी के दरवाजों से प्रदूषण हटाने वाले नगर निगम की कार्यप्रणाली की बावत जानकारी के लिए नगर आयुक्त उदयराज सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। हालांकि मुख्य अभियंता मोहनजी पांडेय बताते हैं कि सीएम आवास, राजभवन व वीआइपी इलाकों में छिड़काव करने का आदेश नगर आयुक्त उदयराज सिंह ने दिया था।

  

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