Pregnant Actress Neha Dhupia Shares Her Opinion on Pregnancy

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

सभी फोटो- अभय वर्मा

लखनऊ।

 

पालीटेक्निक चौराहे पर बड़े मंगल के अवसर पर भंडारा आयोजित किया गया था। भंडारा चल रहा था लेकिन भंडारे में पानी पीकर ग्लास सड़क पर फेकने वाले लोगों की नजरों के सामने दो मासूम छोटू कंधे पर टंगे बोरे में बीन बीन कर ग्लास रख रहे थे। भगवान के नाम पर भंडारा करने वाले लोगों को भी इन मासूमों पर तरस नहीं आ रहा था।

 

प्रदेश में बिजली आपूर्ति करने वाले पावर कार्पोरेशन के गेट के बाहर एक करीब दस बरस की मासूम बच्ची ठेले पर रोटी बनाती दिखीं। खेलने कूदने और स्कूल जाने की उम्र में बच्ची 40 डिग्री तापमान व चिलचिलाती गर्मी में परिवार के भरण पोषण के लिए रोटी बनाती दिखीं।

 

जी हां, यह हकीकत है सबका साथ –सबका विकास की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रामीणों को नसीहत दे रहे हैं कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सतत प्रयास करें। प्रदेश के कबीना मंत्री ओम प्रकाश राजभर तो देवरिया में बच्चों के स्कूल न जाने पर अभिभावकों को जेल भेजने की चेतावनी तक दे आएं लेकिन राजधानी में हर स़ड़क  पर काम करते छोटू किसी को नजर नहीं आते।

विधानसभा हो या लोकभवन। दोनो के आसपास बने चाय के होटल – जलपान गृह में दो से तीन बच्चे काम कर रहे हैं। इन बच्चों से सुबह भट्ठी सुलगने के साथ ही काम लगाया जाता है और उसके बाद ठेला हटने या दुकान बंद होने तक काम कराया जाता है। विरोध करने पर गाली –गलौच और भगा देने की धमकी मगर सरकार इस ओर एकदम बेखबर।

छह महीने में नहीं कोई कार्रवाई नहीं  

बाल मजदूरी अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए श्रम विभाग द्वारा अभियान भी चलाया जाता है लेकिन वसूली तय हो जाने के बाद अभियान भी ठप हो जाता है। श्रम कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले छह महीने में राजधानी में भी कहीं भी, बाल श्रम रोकने के लिए कार्रवाई हुई ही नहीं। अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि किसी भी होटल –ठेले से बच्चों को लाने पर तमाम विरोध झेलना पड़ता है। बाद में बच्चो के परिवार वाले उसे छुड़ा लेते हैं औऱ दोबारा वह काम करने लगते हैं।

 

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