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पटरियों से उखड़ी मिली फिश प्‍लेटें, अधिकारी बोले आम बात

Lucknow | Last Updated : Dec 15, 2017 06:09 AM IST

 

  • ट्रेन रोकी गई, लोगों की जान से हो रहा खिलवाड़
  • डालीगंज से 100 मीटर की दूरी पर मिले स्‍लीपर्स
   
Plan to derail the train in Lucknow City

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

रेलवे की पटरियों से यदि फिश प्‍लेट उखड़ते हैं तो यह कोई बड़ी घटना नहीं है बल्कि सामान्‍य सी घटना है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एनईआर के आलोक कुमार श्रीवास्‍तव कह रहे हैं। दरअसल राजधानी के डालीगंज रेलवे स्‍टेशन से महज 100 मीटर की दूरी पर ट्रेन की पटरी से 25 फिश प्‍लेट उखड़े मिले तो लोगों में हड़कंप मच गया। बड़ी घटना ना हो इसके लिए ट्रेनों को रोक कर उनकी गति धीमी कराई गई और बाद में उन्‍हें रवाना किया गया। मौके पर आलाअधिकारियों से लेकर पुलिस का जमावड़ा लगा तो मजदूरों से फिश प्‍लेटों को ठीक भी कराया गया लेकिन अधिकारियों के लिए यह सब बेहद ही आम बात है। उल्‍लेखनीय है कि इसके पहले जब तीन दिसंबर को 77 फिश प्‍लेट गायब मिले तो इसे रेलवे के अधिकारियों ने आतंकी घटना तक करार दे दिया था। 

डालीगंज रेलवे स्‍टेशन से महज 100 मीटर की दूरी पर डालीगंज क्रासिंग है। इसे 6ए गेट के नाम से जाना जाता है। गेट मैन श्‍यामबाबू ने बताया कि सुबह पटरियों के आसपास बच्‍चे खेल रहे थे। इसी दौरान बउवा यादव ने पटरियों से स्‍लीपर उखड़ने की जानकारी दी और 25 से अधिक स्‍लीपर-हुक लाकर उन्‍हें दिए। इतनी बड़ी वारदात की सूचना मिलते ही गेट मैन के होश उड़ गए। आनन-फानन में उसने आलाधिकारि‍यों को जानकारी दी। मौके पर डीआरएम विजय लक्ष्‍मी कौशिक, कमांडेंट सहरिन सिद्दीकी, इंस्‍पेक्टर हसनगंज सहित भारी संख्‍या में पुलिस बल पहुंच गया। तुरंत ही स्‍लीपर-हुक को लगाने के लिए मजदूरों को बुलाया गया और इसे सही कराया गया। इस दौरान मथुरा सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस भी मेन लाइन में खड़ी रही।

आम लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़-

 

एनईआर पीआरओ आलोक श्रीवास्‍तव तो पटरियों से छेड़छाड़ के मामले को सामान्‍य घटना करार देकर पल्‍ला झाड़ रहे हो लेकिन हकीकत तो यह है कि अधिकारी आम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यही कारण है कि वह ना तो मामले की गंभीरता को ना समझना चाहते हैं और ना ही किसी की जवाबदेही तय करना चाहते हैं। पटरियों से इस तरह फिश प्‍लेटों के निकलने से जहां बड़ी घटना हो सकती है तो वही गैंगमैन और मेंटीनेंस विभाग अपनी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहा है। यही कारण है कि पटरियों से निकली प्‍लेटे उन्‍हें नहीं दिखीं। लापरवाह एनईआर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

तीन दिसंबर को गायब हुए 77 स्लीपर्स-

 

एक ही महीने में दूसरी बार ट्रेन की पटरियों से भले ही छेड़छाड़ हुई हो लेकिन अधिकारी इसे बड़ी घटना नहीं मानते हैं। उल्‍लेखनीय है कि बीते तीन दिसंबर को भी डालीगंज और बादशाह नगर रेलवे स्टेशन के बीच पटरी के 77 स्लीपर्स गायब मिले थे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इसे आतंकी घटना तक करार दिया। एटीएस भी जांच शुरू की लेकिन आज तक कुछ भी हाथ नहीं लगा। मामले पर गैंगमैन संजय की तहरीर पर महानगर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी लिखा गया था।

“डालीगंज के पास कुछ स्‍लीपर-हुक निकलना कोई बड़ी बात नहीं है। क्‍योंकि ट्रेन के आवागमन के दौरान यह कभी-कभी निकल भी जाते हैं। हालांकि इनसे पटरियों पर कोई असर पड़ता है इसीलिए कोई घटना नहीं होती है। हमारे गैंग मैन और अन्‍य स्‍टॉफ समय-समय पर देखरेख करते हुए ठीक करते हैं।”

आलोक कुमार श्रीवास्‍तव

पीआरओ, एनईआर


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