Mahi Gill Regrets Working in Salman Khan Film

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

तेल कारोबारी श्रवण साहू की हत्या में प्रशासन व पुलिस की लापरवाही अब गले की फांस बनने लगी है। पूछताछ में जहां तत्कालीन डीएम गौरीशंकर ने पुलिस द्वारा मृत श्रवण साहू को सुरक्षा की जरूरत न होने की जानकारी देने की बात कही तो लेडी सिंघम की छवि वाली तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी इसके आदेश पुलिस लाइन के प्रसार निरीक्षक को देने की बात कही। लेकिन लिखापढ़ी में फिलहाल कुछ सामने नहीं आया है। ऐसे में पुलिस व प्रशासन की भूमिका संदिग्ध हो गई है। सूत्रों के मुताबिक अब डीएम व एसएसपी को आमने सामने बैठा कर सीबीआई उनसे पूछताछ कर सकती है।

दरअसल अशर्फाबाद निवासी तेल कारोबारी श्रवण साहू अपने पुत्र की हत्या की पैरवी कर रहे थे। हत्या से दो सप्ताह पहले ही उन्होंने अकील व उससे साथियों से जान का खतरा होने की शिकायत पुलिस से की थी और सुरक्षा की मांग की थी। मगर उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई न ही उन्हें असलहे का लाइसेंस दिया गया। उससे बाद बेटे की हत्या के प्रकरण की पैरवी कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे श्रवण साहू की भी उनके घर पर ही हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद व्यापारियों ने भी आंदोलन किया। बाद में सरकार ने घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे। प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई ने तत्कालीन जिलाधिकारी श्रवण साहू को असलहे का लाइसेंस न दिए जाने की बावत पूछताछ की गई। डीएम दफ्तर में पुलिस द्वारा श्रवण साहू की सुरक्षा के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं पहुंची थी। क्षेत्रीय पुलिस की न खुफिया पुलिस की। न ही उनकी सुरक्षा को लेकर कोई अलग फाइल तैयार की गई थी। जिलाधिकारी पुलिस द्वारा उन्हें इस तरह के खतरे में भी नहीं बताया गया था। इसकी कोई फाइल भी जिलाधिकारी कार्यालय में नहीं बनी।

इसी तरह से तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी द्वारा श्रवण साहू की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती का जुबानी आदेश भी अब अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। इस मामले में तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया था। प्रतिसार निरीक्षक ने भी इस तरह का कोई आदेश जारी किए जाने से इंकार किया था। खास बात यह है कि यही जुबानी आदेश अब पुलिस अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। इसमें चौक, बाजार खाला पुलिस के अलावा एसपी पश्चिम व एसएसपी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि मृत श्रवण साहू पहले से ही पुलिस पर बेटे के हत्यारों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे थे।

विरोध भी कर लिया मैनेज

 

पुलिस ने केवल श्रवण साहू की सुरक्षा में लापरवाही बरती बल्कि उनकी हत्या हो जाने के बाद व्यापारियों के विरोध को भी पूरी तरह से मैनेज कर लिया था। नतीजा यह हुआ कि हत्या के बाद विरोध करने पहुंचे व्यापारी आपस में ही उलझ गए थे। इस कारण से वहां भी व्यापारियों के बीच मतभेद होने लगा था। इस मामले में कई व्यापारिक संगठनों ने लखनऊ व्यापार मंडल के कुछ पदाधिकारियों पर तमाम आरोप लगाए थे।

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