Baaghi 2 Assistant Director Name Came in Physical Assault

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।  

 

बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्द‍ीकी को नोएडा में हुए ऑनलाइन घोटाले के मामले में गुरुवार को राजधानी के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में पेश होना था। हालांकि व्‍यस्‍तता के चलते वह तो नहीं आए, लेकिन उनकी ओर से उनके भाई समसुद्दीन सिद्दीकी अपने वकील के साथ उपस्थित हुए और अपना पक्ष रखा। पेशी के बाद बाहर आने पर उन्‍होंने बताया कि उनके भाई नवाजुद्दीन ने वेबवर्क की दूसरी कंपनी एड्सबुकडॉट कॉम के लिए विज्ञापन किया था और यह कंपनी अभी भी चल रही है जो कि भारत सरकार से मान्‍यता प्राप्‍त भी है। इसलिए वह इस मामले में बेकसूर हैं।

 

समसुद्दीन ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय को उन्‍होंने 500 से अधिक ई-मेल और अन्‍य दस्‍तावेज सौंप दिए हैं। उल्‍लेखनीय है कि ईडी की ओर से नवाजुद्दीन को यह दूसरी नोटिस भेजी गई थी। इसके पहले उन्‍हें चार अक्‍टूबर को उनके मुंबई वाले पते पर भी नोटिस भेजा गया था, जबकि उनके भाई ने बताया कि उन्‍हें पहली नोटिस मिली ही नहीं। उन्‍हें जो भी जानकारी हुई थी वह मीडिया के द्वारा ही पता चला था। 


 

 

कंपनी संचालकों अनुराग गर्ग और संजय शर्मा ने गिरफ्तारी के बाद बयान दिया था कि उन्‍होंने प्रमोशन के लिए फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को नोएडा में आयोजित समारोह में बुलाया था और उन्हें कंपनी के विज्ञापन से जोड़ा था। इसके लिए उन्हें एक करोड़ 15 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इसी के बाद यह फिल्‍म अभिनेता इस मामले में आ गया और अब उसके खिलाफ ईडी ने एक्‍शन लिया है। अभिनेता के भाई ने बताया कि विज्ञापन सही था और उसका उन्‍होंने टैक्‍स भी दिया है।

 

 

इन सबके दस्‍तावेज भी हैं आवश्‍यकता होने पर वह ईडी को भी देंगे। अभिनेता के छवि खराब होने पर उन्‍होंने बताया कि मैगी जैसे कई उत्‍पादों के लोगों ने विज्ञापन किए जांच के दौरान उनके सैंपल भी फेल हुए, लेकिन जब उनका नुकसान नहीं हुआ तो नवाजुद्दीन के साथ सबकुछ ठीक-ठाक है। इसलिए उनकी छवि को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचने वाला।

 

 

यह है मामला

मामला नोएडा की वेबवर्क कंपनी के जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार इस कंपनी के संचालकों ने प्रमोशन के लिए अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को एक करोड़ 15 लाख रुपये का भुगतान किया था, जबकि इसका कोई एग्रीमेंट भी नहीं था। यह रकम संचालकों ने धोखाधड़ी करके कमाई थी। मामला प्रकास में आने के बाद इसकी जांच ईडी को दी गई है। ऑनलाइन धोखाधड़ी में वेबवर्क ने पांच आकर्षक स्कीमें लांच करके निवेशकों को केवल लाइक करने पर मुनाफा देने का झांसा दिया था, जिसमें प्रत्‍येक लाइक पर छह रुपये की दर से भुगतान किए जाने का वादा भी किया गया था।

शुरुआत में कंपनी ने हर लाइक पर लोगों को भुगतान भी किया और इसके बाद निवेशकों की रकम हड़पनी शुरू कर दी। निवेशकों ने जब अपना पैसा मांगना शुरू किया तो संचालकों ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। जब इस मामले पर वेबवर्क संचालक अनुराग गर्ग और संजय शर्मा के खिलाफ नोएडा में मुकदमा दर्ज हुआ तो दोनों की गिरफ्तारी भी हो गई।

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