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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

उत्‍तर प्रदेश जमीअत उलमा की निदेशक मंडल की बैठक में तीन तलाक का समर्थन किया गया। इसके साथ ही देश के लिए बनाए जाने वाले सिविल कोड का विरोध करने और शरीअत की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का एलान किया। गोमती नदी तट स्थित झूलेलाल पार्क में आयोजित देश भर से आए मुस्लिम धर्मगुरुओं और आम लोगों ने भाग लिया। बैठक में यह स्‍पष्‍ट किया गया कि निकाह, तलाक, खुला, विरासत आदि इस्‍लाम के महत्‍वपूर्ण हिस्‍से हैं। यह कोई सामान्‍य से शब्‍द नहीं बल्कि अल्‍लाह की किताब और रसूलुल्‍लाह सअव की सुन्‍नत से संबंधित हैं। इनकों बदलने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि निकाह, तलाक, खुला, विरासत यह इस्लाम का हिस्सा हैं। सरकारें इनसे छेड़छाड़ कर रही है, जो संविधान की धारा 25 का उल्लंघन है।

 

अधिवेशन के दौरान मौलानाओं और धर्म गुरुओं ने बढ़ती हिंसा और सांप्रदायिकता पर चिंता जताई। इस पर रोंक लगाने की मांग करते हुए राष्‍ट्रीय एकता पर अपने विचार रखे। आयोजन में मौलाना महमूद मदनी और मनकामेश्‍वर मंदिर की महंत देव्‍यागिरी सहित पश्चिम बंगाल, बिहार और आसम सहित कई जगहों से आए वक्‍ताओं ने अपने विचार रखे। बैठक में दलित मुस्लिम एकता, उनके आपसी खान-पान और भाईचारे पर ध्‍यान देने की बात हुई। मंच से कहा गया कि देश की वर्तमान स्थिति में यह आवश्‍यक है कि दोनों के आपसी संबंधों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

जमीअत के कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों को बुलाकर आयोजन करना होगा। 14 अप्रैल को इस संबंध में एक जुलूस निकाला जाएगा। इसके साथ ही राष्‍ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए धर्म, वर्ग, जाति के आधार पर राजनीति करने वालों के खिलाफ एक होने की बात कही गई। जिससे ऐसे लोगों को बढ़ावा ना मिल सके जो धर्म के नाम पर अपनी रोटी सेंकते हैं। विचारकों ने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि साम्‍प्रदायिक विचार प्रत्‍येक दौर में मौजूद रहे हैं लेकिन, पिछले कुछ दिनों में एक विशिष्‍ट सांप्रदायिकता मानकसिकता से देश में खतरा बढ़ गया है। इसे सुधारने के लिए सभी लोगों को साथ आना होगा। एक साथ संघर्ष करते हुए इस बीमारी से लड़ना होगा क्‍योंकि हमारा देश हमेशा ही शांति का पक्षधर रहा है।

कुछ लोगों ने ही साम्‍प्रदायिकता का पाखंड तैयार किया है और आज वहीं हम लोगों के साथ खेल रहे हैं। समारोह के दौरान अध्‍यक्ष जमीअत उलमा मौलाना मत्‍तीनुल हक ओसामा, उपाध्‍यक्ष हाफिज पीर साहब, जमीअत उलमा बंगाल से अध्‍यक्ष मौलाना सिद्दीकुल्‍लाह चौधरी, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश जमाती इस्‍लामी नईम अमीर, जमात उलमा ए हिंद सचि‍व मौलाना सैयद महमूद सहित कई मौलाना मौजूद रहे।

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