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तीन दिवसीय लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल का आगाज

Lucknow | 10-Nov-2017 22:50:00 | Posted by - Admin
   
Literate Festival in Lucknow

 

दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

 

तीन दिवसीय लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल का आगाज अभिनेता शत्रुघ्न सिंहा और अभिनेत्री दिव्या दत्ता की खास बातों के साथ यादगार बन गया। लखनऊ सोसाइटी की ओर से गोमती नगर के शीरोज कैफे में शुरू हुए इस फेस्टिवल का आगाज पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने किया। जहां कुरैशी ने अदब और भाषा पर बात भी की। इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत की उपेक्षा पर चिंता भी जतायी। 

 

लिटरेरी फेस्टिवल में दोपहर से ही साहित्यकारों का जमावड़ा लग गया था। सबसे पहला सेशन अभिनेत्री दिव्या दत्ता की बुक मी एंड मम पर केन्द्रित रहा। दिव्या दत्ता ने अपने किताब के माध्यम से अपनी जिन्दगी के कई पहलुओं से सभी को रू-ब-रू कराया। दिव्या ने बताया कि किताब को लिखने की पीछे की वजह मेरी मां है, जिसने मुझे हमेशा ताकत दी। मुझे ये एहसास कराया कि मैं कमजोर नहीं हूं। इसके साथ ही विद्या ने लखनऊ से अपनी दोस्ती बताते हुए कहा कि ये शहर तो अब अपना सा हो गया है। कोई न कोई काम पड़ता ही है और यहां आना होता रहता है। साथ ही दिव्या ने साहित्य के बारे में कहा कि साहित्य ही तो है जो हर किसी को संभालने का काम करता है।

(फोटो:अभय वर्मा)  

(फोटो:अभय वर्मा)

कार्यक्रम में दूसरा और सेशन अभिनेता शत्रुघ्न  सिंहा के नाम रहा है। शत्रुघ्न की बायोपिक एनीथिंग बट खामोश को लिखने वाली भारती प्रधान ने शत्रुघ्न सिंहा से खूब बातें की। कार्यक्रम में जो विरोध हुआ था, उस दौरान शत्रुघन सिंहा भी मौजूद थे। इस पर उन्होंने कहा कि मैंने पूरा देश घूमा है, ये सब देखता रहता हूं। इन सब चीजों से मुझ पर फर्क नहीं पड़ता है। ये युवा जोश है जो झलक जाता है। मंशा किसी कार्यक्रम को बिगाड़ने की नहीं होती है। इसके बाद शत्रुघ्न सिंहा ने अपने खास अंदाज में खामोश बोलते हुए श्रोताओं को दिल जीत लिया। वहीं उन्होंने अपनी जिन्दगी के खास पलों से भी सभी को रू-ब-रू कराया। समारोह में परवीन तल्हा, पंकज प्रसून, विशाल मिश्रा, शमीम आरजू के साथ ही तमाम लोग मौजूद रहे।

(फोटो:अभय वर्मा)

कवि नरेश सक्सेना को प्राइड ऑफ लखनऊ अवार्ड

 

समारोह में वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना को उनके साहित्य में योगदान के लिए लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल में प्राइड ऑफ लखनऊ अवार्ड से सम्मानित किया गया। नरेश सक्सेना ने कहा कि अच्छा लगता है जब सम्मान मिलता है क्योंकि ये सम्मान आपके काम की पहचान है। नरेश ने कहा कि लखनऊ में काफी बड़े साहित्यकार है। जिन्होंने खूब नाम कमाया है। इसके बावजूद भी मुझे सम्मान मिलना गर्व की अनुभूति कराता है।

(फोटो:अभय वर्मा)

अजीज कुरैशी ने साधा निशाना

 

पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस पार्लियामेंट में 450 करोड़पति अरबपति भरे हों, वो महात्मा गांधी, इंदिरागांधी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पार्लियामेंट नहीं हो सकती। यह बातें उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी ने उद्घाटन के दौरान बतौर अतिथि कहीं। उन्होंने गोपाल दास नीरज के गीत वो दिन जल्द आयेगा, जब यह राजपथ जनपथ में बदल जायेगा सुनाते हुये कहा कि मैं खुद भूल गया राजपथ जनपथ को। जनपथ को छोड़ राजपथ का हो गया। धोखा दिया। यह ट्रेजडी नस्लों की है, जिन्होंने क्रांति से देश बदलने का फैसला किया था वह भटक गये।  जिसमें उन्होंने कहा कि संस्कृत की तरक्की के लिए कुछ नहीं हुआ। जबकि हिंदुस्तानी अदब में संस्कृत का असर रहा है। अदब, शासक और साहित्य का साथ हमेशा रहेगा, इन्हें जब-जब अलग करने की कोशिश की जायेगी, अंजाम बुरा होगा।

 

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