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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

लखनऊ विकास प्राधिकरण का खजाना खाली हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि इस बार दीपावली पर 2100 कर्मचारियों के वेतन के भी लाले पड़ जाएंगे। कंगाल हो चुके एलडीए के पास न तो पैसा बचा है और न ही एफडी। उल्‍लेखनीय है कि एलडीए के खाते में 2014 में लगभग 1200 करोड़ रुपये जमा थे। इनमें 800 करोड़ रुपये का केवल फिक्सड डिपॉजिट था। इसी के ब्‍याज से कर्मचारियों को वेतन मिलता था। लेकिन भ्रष्‍ट अधिकारियों ने इसे तुड़वा कर सीजी सिटी और मोहान रोड योजना पर लगा दिया। हालांकि वर्तमान में दोनों परियोजनाओं से एलडीए को कोई आय नहीं हो रही है।

 

 

लंबे समय से जमीन की कमी से जूझ रहे एलडीए को आय बढ़ाने के लिए काफी कवायद करनी पड़ रही है, लेकि‍न अभी तक कुछ भी उसके पक्ष में जाता नहीं दिख रहा है। जमीन न होने के कारण ही मोहान रोड की परियोजना  ठप पड़ी है। इतना ही नहीं लंबे समय से प्राधिकरण की कोई आवासीय योजना भी नहीं आई। इन सबका असर कोषागार में पड़ना ही था। लक्ष्‍य के अनुरूप न तो शमन शुल्क जमा हो रहा है और न ही विकास शुल्क जमा हो रहा है। इतना ही नहीं वित्‍त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह भले ही कोष होने का दम भर रहे हों लेकिन आय-व्‍यय का लेखा जोखा नहीं बन पाया है।

 

 

साथ ही साथ कितना बजट एलडीए के पास है इसकी भी कोई लिखा-पढ़ी ही नहीं है। हालांकि मामले की जानकारी होने पर सचिव एलडीए जय शंकर ने वित्‍त नियंत्रक को तलब कर जानकारी मांगी है। कोषागार की स्थिति का कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार एलडीए को अपनी सम्पत्तियों को बेचकर ही आय करनी है, लेकिन परियोजनाओं के पूरा न होने के कारण नीलामी नहीं हो पा रही है।

 

 

नीलामी में अड़ंगा

एलडीए के पास लगभग छह हजार से अधिक फ्लैट खाली पड़े हैं। इनकी नीलामी भी की जानी है। इसमें मानसरोवर योजना, मेघा अपार्टमेंट, भरणी अपार्टमेंट, आद्रा अपार्टमेंट, श्रवण अपार्टमेंट, सोपान इन्क्लेव, सृजन अपार्टमेंट, शारदा नगर योजना, जनेश्वर इन्क्लेव, जानकीपुरम सहित कई योजनाएं हैं। अगस्‍त माह में परियोजनाओं की नीलामी के लिए समय भी रखा गया लेकिन समय से पूरा न हो पाने के कारण संपत्तियों की नीलामी नहीं हो पाई थी। उल्‍लेखनीय है कि आय बढ़ाने के लिए छह सदस्‍यीय टीम बनी हुई है।

 

 

2100 कर्मचारियों से चल रहा एलडीए

लखनऊ विकास प्राधिकरण में लगभग 2100 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसमें प्रतिनियुक्ति अधिकारियों से लेकर संविदाकर्मी, ठेका कर्मचारी, मृतक आश्रितकर्मी सहित कई अधिकारी शामिल हैं। एलडीए के कोष से ही इनका वेतन दिया जाता है। विभाग की नीलामी मंद पड़ने से सबकुछ गड़बड़ा रहा है। वेतन की बात की जाए तो प्राधिकरण लगभग 13 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च करता है। प्राधिकरण कर्मचारी संगठन के महामंत्री एसपी सिंह ने बताया कि यदि बड़े अधिकारी अपनी मंशा ठीक कर लें तो इस समस्‍या से निपटा जा सकता है।

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