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नेतागिरी की नर्सरी में गिरगिटों के तेवर...

Lucknow | 14-Nov-2017 12:30:29 | Posted by - Admin
  • टिकट कटते ही घंटों में बदल गई निष्ठा
  • गद्दार दे रहे हैं वफादारी की दुहाई  
   
Latest Updates over Local Body Election 2017 in UP

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

समाजवादी पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद में नवरात्र–दीपावली पर क्षेत्रीय लोगों को बधाई संदेश। हर बीस मीटर की दूरी पर बिजली के पोल पर चमकते होर्डिंग, लेकिन दीपावली बीतते ही आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर लोगों से वोट की याचना।

जी हां, नेतागिरी की नर्सरी पहले कदम पर युवा नेताओं के तेवर गिरगिटों को भी मात देते दिख रहे हैं। एक दो नहीं बल्कि ऐसे प्रत्याशियों की संख्या दर्जनों में हैं।

 

 

वैसे राजनीति में वफादारी और जनता के भरोसे का कत्ल करने में कोई नेता पीछे नहीं है। हर दल की यही कहानी है। पूर्ववर्ती सरकार के खासमखास रहे एमएलसी गोमती नदी की डूब की जमीन पर मुआवजा हासिल करने से लेकर अवैध निर्माण के लिए चर्चित रहे।

 

नई सरकार बनने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपना पुराना चोला बदला यानी सपा को छोड़ भाजपा का दामन थामा। भाजपा ने भी उन्हें भरपूर प्रेम से गले लगाया और अब पार्षद चुनाव में हुसैनाबाद वार्ड से उनके पुत्र को टिकट दे, उपकृत भी कर दिया। जबकि पार्षद महोदय ही दो अवैध कांप्लेक्स के मालिक हैं मगर उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा इस बावत पूछने पर उसे डिबेट का विषय करार देते हैं।

 

 

इसी तरह से डेढ़ महीने पहले से ही चौक क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय एक प्रत्याशी ने अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव सहित समाजवादी पार्टी के तमाम नेताओं की फोटो वाले पोस्टर लगाकर निकाय चुनाव में पार्षद प्रत्याशी के तौर पर हुंकार लगाई थी। ये पोस्टर जगह-जगह आज भी लगे हुए हैं मगर अंतर सिर्फ इतना है कि प्रत्य़ाशी समाजवादी पार्टी छोड़ आम आदमी पार्टी से अपना भाग्य आजमा रहे हैं।

 

यह हाल राजधानी के तीस फीसद से अधिक वार्ड में देखने को मिल रहा है। दरअसल, तमाम प्रत्याशी पहले अपने मनपंसद दल में टिकट के लिए मशक्कत कर रहे थे। उसी पार्टी को सबसे बेहतर बता रहे थे मगर टिकट कटा तो सबसे पहले पार्टी खराब हुई और उसके बाद पुरानी निष्ठा ठिकाने लग गई।

 

बदल गए हैं मायनें

चौक निवासी करीब अस्सी वर्षीय राजाराम कपूर बताते हैं कि यही राजनैतिक पतन है। दरअसल अब सिद्धांत और नियम अब किसी के लिए मायने नहीं रखते हैं। कभी वह दौर भी था कि जब लोग अपने से ऊपर संगठन–पार्टी को समझते थे, लेकिन अब लोग पहले खुद का लाभ तय करते हैं। यही कारण है कि राजनीति केवल व्यापार बन कर रह गई है। लोग व मुद्दे भटक चुके हैं। केवल सत्ता तक पहुंचना ही लक्ष्य बन गया है। यही कारण है कि स्थितियां ज्यादा विकट हो रही हैं और सामाजिक मूल्यों का पतन हो रहा है।

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