Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

केंद्र से लेकर प्रदेश की सियासत में कुछ समय पहले तक मुख्‍य एजेंडा बने रहने वाली गो माता आज घास को तरस रहीं हैं। गो वंश रक्षा के नाम पर सड़क से लेकर सदन तक राजनीति करने वाली भाजपा की सरकार अब इनका पेट भी नहीं भर पा रहीं हैं। आलम यह है कि गोशालाओं में गाय के लिए ना तो चारा है और ना रहने का स्‍थान।

राजधानी में ही कान्‍हा उपवन गो शाला का संचालन देखने वाली संस्‍था जीवाश्रय ने अब पल्‍ला झाड़ने की घोषणा कर दी है। संस्‍था के मुताबिक सरकार द्वारा कोई अनुदान ना मिलने के कारण गोशाला में रह रही गायों को चारा तक नहीं मिल रहा है।

 

 

 

भारतीय जनता पार्टी सरकार में गो सेवा करने वालों की कमी नहीं है लेकिन कान्‍हा उपवन की गोशाला में गो-वंश को चारा खिलाने के लिए एक पैसा भी नहीं बचा है। इस कारण गोशाला के 2700 पशु भुखमरी के कगार पर पहुंच गए तो वहीं अधिकारी भी अपनी जिम्‍मेदारी से भाग रहे हैं। यही कारण है कि प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह तीन करोड़ रुपये अनुदान दिलाने के आश्‍वासन के बाद भी पीछे हट गए।

 

 

अब यहां काम करने वाली संस्‍था जीवाश्रय समिति के सचिव यतींद्र त्रिवेदी विरोध स्‍वरूप भूख हड़ताल करने जा रहे हैं। उन्‍होंने सरकार और अधिकारियों पर न्‍याय ना करने का आरोप लगाया है। सरकार द्वारा गोशाला को करीब 50 रुपए प्रतिदिन प्रतिगाय चारे की दर से अनुदान दिया जाता रहा है लेकिन योगी सरकार ने अभी तक कोई फंड नहीं दिया है।

 

 

दो करोड़ रुपये के घाटे पर चल रही जीवाश्रय समिति के सचिव यतींद्र त्रिवेदी ने बताया कि धनराशि भुगतान को लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह से वार्ता और पत्राचार किया गया। इस पर उन्‍होंने सहयोग देने को कहा था। हालांकि समय बीतने के बाद वह अपनी बात से मुकर गए। इतना ही नहीं उन्‍होंने एग्रीमेंट में सरकार की ओर से अनुदान की कोई व्यवस्था ना होने का भी हवाला दिया।

 

इस तरह अब गो शाला को कोई अनुदान नहीं मिल पाएगा। जीवाश्रय समिति के सचिव अब नगर आयुक्त को भी पत्र लिखकर फिर से मामले को अवगत कराएंगे। उन्‍होंने बताया कि इस स्थिति में पशुओं की सेवा कर पाना संभव नहीं है और अब वह गोशाला को नगर निगम को हैंडओवर करने जा रहे हैं।

 

 

“गोशाला को लेकर हमसे कोई बातचीत नहीं हुई है। नगर विकास विभाग की ओर से कोई अनुदान भी जारी नहीं होता है। जो भी प्रक्रिया होती है वह पशु पालन विभाग देखता है। इसलिए गो-शाला के अनुदान से हमारा लेना-देना नहीं है।“

मनोज कुमार सिंह

प्रमुख सचिव नगर विकास

 

 

“गो शाला में 2700 पशु हैं। इस वर्ष बजन जारी ना होने के कारण पशुओं के चारे और चोकर में गंभीर समस्‍या आ रही है। अभी तक दो करोड़ का बकाया हो गया है। चारे के बजट को लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास से वार्ता भी हुई थी। इस पर उन्‍होंने दो दिन के अंदर तीन करोड़ रुपये के भुगतान कराने का आश्‍वासन दिया था। हालांकि इसके बाद मामले से पल्‍ला झाड़ते हुए खुद को अलग कर लिया। अब समिति के कर्मचारी शनिवार से भूख हड़ताल पर बैठेगे और बजट बहाली की मांग करेंगे।”

यतींद्र त्रिवेदी

सचिव जीवाश्रय समिति

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