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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

राजधानी के भू माफियाओं पर लखनऊ विकास प्राधिकरण की कृपा बनी हुई है। यही कारण है कि प्रशासन द्वारा मांगी गई भू माफियाओं की सूची में प्राधिकरण के अधिकारियों ने खेल कर दिया। जिसके कारण आज तक एक भी भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई। दरअसल, प्राधिकरण ने जिला प्रशासन को जो सूची सौंपी उसमें भू माफिया का नाम और क्षेत्र लिखकर खानापूर्ति कर ली गई। इसमें ना तो किसी भी आरोपी का पता दर्ज है और ना ही फोन नंबर दिया गया। मामले पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने एलडीए वीसी प्रभु नारायण सिंह से भू माफियाओं की स्‍पष्‍ट सूची भेजने को कहा है।

 

 

जिलाधिकारी ने एलडीए को अपनी जमीन पर भू माफिया खोजने के आदेश दिए तो कर्मचारी इस अभियान में जुट गए। हीलाहवाली के बाद जब प्राधिकरण ने खोजबीन शुरू की तो उसे केवल 10 ही भू माफिया मिले। इसमें भी अधिकारियों ने जिनका नाम शामिल किया उनका पूरा परिचय ही नहीं दिया। इनमें से कुछ नाम अमानुल्‍लाह खान भाईजान, देवेश यादव, रियाजुल, मिश्रीलाल यादव, सतीश यादव, संजय राजपूत एडवोकेट,  गोपाल सिंह, सुरेश कुमार और शिव प्रकाश मिश्र शामिल हैं।

एलडीए ने आनन-फानन में अपना भू माफिया वाला कोटा तो पूरा कर लिया लेकिन प्रशासन को आधी-अधूरी सूची भेज कर देकर अपनी ही फजीहत जरूर करा ली। भू माफियाओं का प्रभार  देख रहे एडीएम प्रशासन श्रीप्रकाश गुप्‍ता ने डीएम को मामले से अवगत कराया। इस पर जिलाधिकारी ने वीसी एलडीए को नई और व्‍यवस्थित सूची जल्‍द से जल्‍द भेजने को कहा है। 

 

 

मुख्‍यालय तक दौड़ने लगे भू माफिया-

नवंबर माह में भू माफियाओं की सूची जारी हुई और जिला प्रशासन को भेज दी गई। कुछ के नाम मीडिया में उछले तो वह अपना नाम हटवाने के लिए एलडीए मुख्‍यालय का चक्‍कर काटने लगे। कभी विहित प्राधिकारी विश्‍वभूषण मिश्र से जुगाड़ लगाने लगे तो कभी किसी और का जुगाड़ लेकर अपना नाम हटाने का प्रयास करने लगे। हालांकि किसका नाम हटा और किसका नाम जुड़ा इसे फिलहाल गोपनीय बना दिया गया है। अब डीएम के निर्देश पर एलडीए जल्‍द ही नई सूची तैयार करने का दम भर रहा है।

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