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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

नए वादों का जो डाला है वह जाल अच्छा है, रहनुमाओं ने कहा है कि... अच्छा है। देश में जीएसटी की स्थिति कुछ इसी तरह की है। सरकार अच्छे दिन के सपने जरूर दिखा रही है, वह भी नींद की गोलियों के सहारे।

जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लेकर व्यापारियों और जनता के निशाने पर रही केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 200 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स की दरें 28 फीसद से कम कर पांच से 18 फीसद तक कर दीं, लेकिन इससे आम जनता को फायदा कब होगा, यह मालूम नहीं है। इसकी वजह भी जान लीजिए।

 

 

दरअसल, बाजारों में जो उत्पाद उपलब्ध हैं, उन पर एमआरपी पुराने टैक्स के हिसाब से दर्ज है और लोगों को वह उतने ही दाम पर मिल रही है। यही नहीं, लोगों को टैक्स घटने का लाभ कैसे मिलेगा, इस बारे में भी कोई बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में साफ है कि टैक्स की कमी तथा दाम गिरने की संभावनाएं केवल भ्रम हैं।

सवाल यह है कि आम लोगों को लाभ नहीं मिलेगा तो एक राष्‍ट्र एक टैक्स की अवधारणा कैसे पूरी होगी, यह सरकार ही शायद बेहतर जान रही है।

 

 

यह पहली बार नहीं है। इसके पहले अक्टूबर प्रथम सप्ताह में जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई उत्पादों पर टैक्स की दरें कम की गई थीं, लेकिन उसकी अधिसूचना आज तक जारी नहीं हुई है। खास बात यह है कि उस बैठक में बच्चों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कलर पेंसिल, कलर्स सहित स्टेशनरी के तमाम उत्पाद थे, लेकिन आज तक उन पर 28 फीसद ही टैक्स लग रहा है। यानी सरकार का फैसला व घोषणा महज भ्रम भर था।

यही हाल रेस्त्रां में खाने पर था। उस पर टैक्स कम करने की घोषणा हुई थी, लेकिन वहां भी नोटीफिकेशन जारी नहीं हुआ। इस बार सरकार ने कुछ इसी तरह से भ्रम फैलाया है।

 

 

दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई से लेकर सितंबर तक तकरीबन सभी सामान एफएमसीजी, इलेक्ट्रानिक्स, मोबाइल आदि सभी की आपूर्ति प्रभावित हो गई थी। नई टैक्स प्रणाली के तहत तमाम उत्पादों के दाम कम तो नहीं हुए, अलबत्ता बढ़ गए थे। उसके बाद सितंबर में दशहरा, नवरात्र तथा दीपावली पर्व के मद्देनजर आपूर्ति कुछ सामान्य हुई।

नई एमआरपी व पैकिंग का सामान बाजारों इस समय भरा है। अब सवाल यह है कि जिन वस्तुओं के दाम पहले से ज्यादा अंकित हैं, उन्हें कम कीमत पर कैसे बेचा जाएगा।

 

 

एएफएमसीजी एसोसिशन के महामंत्री विनोद अग्रवाल के मुताबिक सरकार की इस घोषणा का कोई लाभ नहीं होने जा रहा है। कारण है कि जो दुकानदार पहले ज्यादा कीमत पर माल खरीदेगा, उसे कैसे कम दाम पर बेचेगा। इतना जरूर है कि इसका फायदा कंपनियां और बड़े कारोबारी जरूर उठाएंगें। स्कीमों के नाम पर पूरा फायदा कंपनियों को ही पहुंचेगा जबकि आम लोगों को ज्यादा कीमतें ही अदा करनी होंगी।

 

 

इसी तरह से स्टेशनरी कारोबारी जितेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक सरकार केवल बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। आम उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है, उसे किसी तरह का लाभ नहीं मिलने वाला है। वह केवल भ्रमित होगी, लेकिन राहत किसी तरह की नहीं मिलेगी।

 

 

केवल एक टैक्स एक रेट ही समाधान

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल के मुताबिक सरकार के फैसले केवल भ्रम फैलाने वाले हैं। कारण है कि सरकार जीएसटी की सरलीकरण करना नहीं चाहती है। बिना एक रिटर्न एक टैक्स की व्यवस्था के इसका कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। दुनिया में जिन देशों जीएसटी लागू है वहां टैक्स की दर एक है। रिटर्न भी एक है। मगर यहां पर सरकार पूरी प्रक्रिया को इतना जटिल किए है कि उससे लोगों को कोई राहत मिलती दिख रही है, न कारोबारी को। केवल चुनावों को देखते हुए सरकार ने इस तरह का भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

 

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