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दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भले ही राजधानी सहित कई जनपदों की जेलों में कैदियों में एड्स होने का दावा कर रहा हो लेकिन आइजी जेल पीके मिश्र ने ऐसी किसी रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्‍होंने बताया कि वह ऐसी किसी भी रिपोर्ट को नहीं मानते हैं। हालांकि आइजी कारागार ने यह भी कहा कि जेल के कैदियों में एड्स जैसी कोई बीमारी नहीं है लेकिन एक-आध मामले होंगे तो उपचार कराया जाएगा। उल्‍लेखनीय है कि पिछले दिनों गोरखपुर, बरेली, इलाहाबाद,  फैजाबाद, आगरा, मेरठ, वाराणसी और कानपुर समेत कई जेलों के कैदियों में एचआइवी पॉजटिव होने की बात सामने आई थी। इन मीडिया रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार ने जेल प्रशासन को नोटिस भेज कर इस पर रिपोर्ट तलब की है।    

 

उत्तर प्रदेश की जेलों में एचआइवी पीड़ितों की बड़ी संख्या होने की बात सामने आने के बाद जेल प्रशासन भी सकते में है। मानवाधिकार आयोग ने जेल व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल, प्रदेश की 70 जेलों के कैदियों का एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) टेस्ट कराया गया था।  इसमें 265 कैदियों को एड्स की बीमारी होने की बात सामने आई है। जबकि मामले पर आइजी कारागार लखनऊ पीके मिश्र ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए प्रश्‍न चिन्‍ह लगाया कि हमारे यहां कोई भी एचआइवी पीडि़त नहीं है। जब ऐसी कोई बिमारी है ही नहीं तो रोकथाम या अन्‍य सुरक्षा की बात ही नहीं है। हालांकि उन्‍होंने यह जरूर कहा कि यदि ऐसा कोई मामला आता है तो उसे देखा जाएगा।

उधर मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर जेलों में कैदियों को एड्स कैसे हो गया।  इसकी जानकारी करने के लिए तुरंत उच्‍च स्‍तरीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इतना ही नहीं इसके रोकथाम और सुरक्षा के लिए तत्‍काल भी किए जाएं। ताकि अन्‍य कैदियों को इस जानलेवा संक्रमण से बचाया जा सके। पिछले वर्ष अक्टूबर माह में उत्‍तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की पहल पर एचआइवी वायरस का पता लगाने के लिए कैदियों का रक्त परीक्षण किया कराया गया था। एलाइजा जांच के बाद 21 विचाराधीन कैदी, एक महिला सहित तीन सजा पाए कैदियों के नमूने पॉजटिव आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। आयोग ने प्रदेश सरकार को एड्स के बढ़ते मामलों पर नोटिस जारी किया है।

 

जानकारी के अनुसार आयोग ने सरकार से कहा है कि छह सप्‍ताह के अंदर मामले पर रिपोर्ट दाखिल करें साथ ही साथ यह भी बताएं कि एड्स की रोकथाम के लिए क्‍या कदम उठाए गए हैं। आयोग ने जेलों की बदहाली पर गंभीर चिंता भी जताई है। 

“जेल के कैदियों में एड्स की रिपोर्ट जैसी कोई भी जानकारी राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग से प्राप्‍त नहीं हुई है और मैं इस तरह की किसी भी रिपोर्ट को नहीं मानता हूं। हमारे कैदियों में एड्स रोग जैसी कोई बात नहीं है। यदि ऐसी कोई बात सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा।”

पीके मिश्र

पुलिस महानिरीक्षक, कारागार

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