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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

राजधानी के सबसे व्यस्त क्षेत्र में करोड़ों रुपये से बिजली की लाइनें भूमिगत की गईं। काम भी पूरा हो गया लेकिन तारों का मकड़जाल हटा न पोल। मगर कार्यदायी कंपनी को पूरा भुगतान जरूर हो गया। आलम यह है कि करीब 27 करोड़ का भुगतान होने के बाद भी लेसा के मुस्तैद अभियंता यह नहीं बता पाते कि आखिर काम हुआ क्या।

 मध्‍यांचल विघुत वितरण प्रबंधन के द्वारा भूमिगत लाइन बिछाने का निर्णय लिया गया था। बिजली के तारों को भूमिगत करने के कार्य एक निजी कम्‍पनी को सौंपा गया था। भूमिगत लाइन बिछाने के लिए करीब 26 से 27 करोड रूपये का बजट आवंटित हुआ था। लेसा अभियंताओं ने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने के लिए जो प्रस्‍ताव तैयार हुआ था वह पूरा हो चुका है लेकिन तार पूरे अमीनाबाद में जस के तस दिख रहे हैं। अमीनाबाद संघर्ष समिति के सुरेश छबलानी के मुताबिक पूरे नजीराबाद में कहीं भूमिगत लाइन बनने से कोई बिजली की लाइन नहीं हटाई गई। अभी वैसे ही पोल पर लाइनें दौड़ रही हैं। चारों तरफ बिजली के खम्‍भे लगे हुए है वहीं बिजली के तारों का मकडजाल भी फैला हुआ है। संघर्ष समिति के विनोद अग्रवाल भी प्रताप मार्केट, मुमताज मार्के आदि इलाकों में पोल पर बिजली लाइनें होने की बात कहते है जबकि स्वदेश मार्केट में गली पतली होने के कारण न होने की बात खुद अभियंता कहते हैं। गुईन रोड स्टेशनरी मार्केट के अध्यक्ष जितेंद्र चौहान भी बिजली की लाइनें पहले जैसी होने की बात कहते हैं तो मौलवीगंज में काम न होने की दलील अभियंता बताते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर 27 करोड़ रुपये खर्च कहां हुए। इस काम का सत्यापन किसने किया और जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जाती है। व्यापारियों ने अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर करने का दावा किया है। 

अमीनाबाद के अधिशासी अभियंता रमेश चन्‍द्र के मुताबिक कुछ क्षेत्र को छोडकर अधिकांश जगहों में भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। उन्‍होने बताया कि नियामतउल्‍ला रोड,मोहन मार्केट,अमीनाबाद पार्क, झण्‍डेवाला पार्क, स्‍वदेश मार्केट,मेडिसिन मार्केट,अमीनाबाद थाने से पूजन भण्‍डार तक भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है मगर बिजली के पोल व लाइनें क्यों नहीं हटे, इसका जवाब उनके पास भी नहीं है।  

काम कम घोटाला ज्यादा

अमीनाबाद में बिजली लाइनों को भूमिगत करने काम लेसा अभियंताओं के घोटाले से कम नहीं है। खास बात यह है कि इस काम के दौरान क्षेत्र में तैनात रहे वितरण इकाई के अधीक्षण व अधिशासी अभियंता इसे निर्माण मंडल का दायित्व करार देते हैं तो निर्माण मंडल के अधिकारी पूर्ववर्ती अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ देते हैं। अभियंता यह तक बताने को तैयार नहीं है कि इस पूरे काम का सत्यापन किसने किया। कारण है कि निर्माण के कार्य का भुगतान  सत्यापन के बाद ही किया जाता है। निर्माण मंडल के अधीक्षण अभियंता रामप्रकाश ने बताया कि कार्यदायी एजेंसी को कितना और कैसे भुगतान हुआ है, इसकी जानकारी मांगी जा रही है।

यह काम मेरी तैनाती के पहले का है। अभी काम पूरा नहीं हुआ है। अगर इसे पूर्ण बताया जा रहा है तो इसकी जानकारी ली जाएगी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर उसकी जांच कराई जाएगी।

एके सिंह

मुख्य अभियंता लेसा

(सिस गोमती)

 

लाइनों को भूमिगत करने में कोई गड़बड़ी की गई है तो यह प्रकरण कार्पोरेशन अध्यक्ष के संज्ञान में लाया जाएगा। साक्ष्य मिलने पर प्रकरण की जांच कराई जाएगी।   

केके सिंह

जनसंपर्क अधिकारी

पावर कार्पोरेशन

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