Actress katrina Kaif and Mouni Roy Visited Durga Puja Pandal

दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

पूर्व सपा एमएलसी बुक्‍कल नवाब भगवा रंगत में क्‍या रंगे कि सरकारी खजाने से धोखाधड़ी और अवैध निर्माण तक की जांचे उलझ गईं। बात चाहे जियामऊ में गोमती नदी की डूब की जमीन के फर्जी मुआवजा का हो या फिर हुसैनाबाद के हेरिटेज जोन में अवैध निर्माण का रहा हो। एक ओर जहां सारी कार्रवाई ठंडे बस्‍ते में चली गई तो वहीं अधिकारी भी अब कुछ पूछने पर बगलें झाकनें लगते हैं।

दरअसल बुक्‍कल नवाब ने गतल तरीके से जियामऊ की जमीनों पर मुआवजे के लिए अपना दावा ठोक दिया। जब रकम नहीं मिली तो उन्‍होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसपर न्‍यायालय ने भुगतान किए जाने का आदेश दे दिया। इसके बाद जब इसकी शिकायत हुई तो न्‍यायालय ने प्रशासन से जमीन पर जानकारी मांगी। प्रशासन ने बुक्‍कल से दस्‍तावेज मांगे तो वह मूल दस्‍तावेज नही दिखा सकें। इस पर प्रशासन ने उनके खिलाफ फर्जी मुआवजा लेने का आरोप लगाते हुए 6 करोड़, 94 लाख, 67 हजार रुपये की रिकवरी नोटिस जारी कर दिया। सूत्रों की माने तो मामले पर बुक्‍कल नवाब ने प्रशासन को जवाब दिया कि जमीन पर उनका नाम है इसलिए वह एक पैसे की भी रिकवरी नहीं करेंगे। हालांकि प्रशासन इस पर कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। एडीएम भूमि आध्‍याप्ति आरके तिवारी ने बताया कि बुक्कल नवाब के नाम से जियामऊ में जो जमीनें दर्ज है वह उनका जमींदारी उन्‍मूलन के समय उनके नाना-नानी को भुगतान भी किया जा चुका है। लेकिन नाम नहीं हट पाया। जिसके कारण आज भी इन जमीनों पर बुक्‍कल का नाम दिखा रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

जांच उलझाने के लिए ओढ़ा भगवा चोला  

 

अपने ऊपर कई तहर की जांचों से बचने बुक्‍कल नवाब ने सपा छोड़ी और राहत की उम्‍मीद लेकर भाजपा में शामिल हो गए। इसके लिए उन्‍होंने हजरतगंज चौराहे से लेकर कई मुख्‍य चौराहों पर राम-रहीम समर्थन में बातें भी लिखवाईं और मंदिर बनाने के लिए रुपये पैसे भी देने की बात की। इतना ही नहीं सेटिंग करते हुए हुसैनाबाद से अपने बेटे को पार्टी के टिकट पर पार्षद भी बना दिया। सभी पहलुओं पर गौर किया जाए तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बुक्‍कल नवाब जिस लक्ष्‍य को लेकर सपाई छोड़ भाजपाई हुए उन्‍हें उसका लाभ मिल रहा है।

हे‍रिटेज जोन में अवैध निर्माण का मामला-

 

घंटाघर स्थित हेरिटेज जोन में बुक्‍कल नवाब में बिना नक्‍शा पास कराए एक साथ तीन बिल्डिंगें बना डाली। जिस समय यहां पर निर्माण चल रहा था उस समय बुक्‍कल समाजवादी पार्टी में एमएलसी थे। सत्‍ता की हनक से एलडीए पर ऐसा दबाव बनाया कि प्रवर्तन अधिकारी से लेकर वीसी तक सब कुछ जानने के बाद भी कुछ नहीं कर सके। सरकार बदली तो मामले पर कार्रवाई होनी भी शुरू हो गई। आनन-फानन में उन्‍हीं अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी जो कभी संरक्षक बने रहे। हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद बुक्‍कल ने सपा से इस्‍तीफा देते हुए भाजपा में शामिल हो गया। इसके बाद मामला मंडलायुक्‍त के यहां पहुंचा तो वहां से भी कार्रवाई करने का आदेश हो गया। हालांकि एक बार फिर से सत्‍ता करीबी हो जाने का लाभ बुक्‍कल को मिला और यह कार्रवाई भी जहां की तहां ठहर गई। अब वीसी पीएन सिंह से लेकर सचिव मंगला प्रसाद सिंह तक मामले को देखते हैं तक की रट लगाए हैं लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे।

यह था मामला-

  • जिला प्रशासन के पास जियामऊ में जमीन अधिग्रहण मामले में फर्जीवाड़ा को लेकर आपत्तियां आईं।

  • जांच के दौरान पता चला कि 3.313 हेक्टेयर जमीनों से उनका कोई संबंध नहीं था।

  • इस पर जिला प्रशासन ने 6 करोड़, 94 लाख, 67 हजार रुपये का रिकवरी नोटिस भेजा।

  • एक अगस्‍त 2017 को 15 दिनों का जारी हुआ था नोटिस जिसे आज तक पूरा नहीं किया जा सका।

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