Baaghi 2 Assistant Director Name Came in Physical Assault

दि राइजिंग न्यूज

अभय वर्मा

लखनऊ।

 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद राज्य कर्मचारी कल्याण निगम की कैंटीनों में लगे हजारों कर्मचारी फांके काटने को मजबूर हैं। जुलाई 2017 के बाद उन्हें वेतन नहीं मिला है। सरकार द्वारा राज्य कर्मचारी कैंटीन के उत्पादों पर कोई टैक्स रियायत नहीं दिए जाने के कारण अब यहां मिलने वाला सामान तकरीबन बाजार दर पर मिल रहा है। कंपनी द्वारा जो भी रियायत दी जाती है, वहीं छूट उपभोक्ताओं को मिल रही है। लिहाजा जिन कैंटीन में पहले महीने 20 -25 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, वहां महज एक दो करोड़ रुपये का काम हो रहा है। कारोबार न होने की वजह से कर्मचारियों को वेतन को भी लाले लग गए हैं। दीपावली पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। इससे कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है।

 

राज कर्मचारी कल्याण निगम कैंटीन में प्रदेश में भर करीब 843 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मियों को वेतन कैंटीन में उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय से ही होती थी। अब कैंटीन में व्यापार ही बहुत कम रह गया है, लिहाजा उन्हें वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक कैंटीन में बिकने वाले उत्पादों को जीएसटी में छूट देने के लिए जीएसटी काउंसिल व केंद्र सरकार को कई पत्र भेजे गए थे। केंद्र सरकार ने इसमें राज्य स्तर पर जीएसटी छूट देन के लिए प्रदेश सरकार को अधिकृत कर दिया। हालांकि सेना की कैंटीनों को जीएसटी में छूट प्रदान कर दी गई। लिहाजा राज्य कर्मचारी कैंटीनों में सामान की बिक्री एकदम से घट गई। इसका सीधा असर राज्य कर्मचारियों पर पड़ा है। दरअसल कैंटीन में कर्मचारियों को पहले वैट में छूट मिल जाती थी और सामान बाजार से काफी सस्ता मिलता था। इसी आर्कषण के चलते कर्मचारी कैंटीन व फैमिली बाजार में उम्दा कारोबार होता था। मगर जीएसटी लगने के बाद यह छूट समाप्त हो गई।

कर्मचारी कल्याण निगम कैंटीन के हैदर अली अंसारी ने बताया कि पहले सामान पर टैक्स की छूट होने के कारण यहां बढ़िया कारोबार होता था। बड़ी कंपनियों के उत्पाद ज्यादा बिकन पर कंपनी से इंसेंटिव भी मिलते थे और उससे कर्मचारियों को फायदा होता था। मगर जीएसटी के बाद यह समाप्त हो गया है। लिहाजा कैंटीन का कारोबार भी दस फीसद ही रह गया है और इसका सीधा असर यहां की आय पर पड़ा है। आय न होने की वजह से कर्मचारियों महीनों से तनख्वाह भी नहीं मिल पाई है।

प्रदेश सरकार को दिया पत्र

 

राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मियों के मुताबिक केंद्र सरकार ने राज्य जीएसटी की छूट प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को अधिकृत किया है। इसके लिए शासन को पत्र भेजकर राज्य जीएसटी माफ करने को कहा गया है। इसके बाद उत्पादों की बिक्री बढ़ने तथा कैंटीनों में फिर से कारोबार बढ़ने की संभावना है। हालांकि फिलवक्त इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। दरअसल गुड्स एंड सर्विस टैक्स के अंतर्गत अब निर्धारित टैक्स दर का पचास फीसद केंद्रीय जीएसटी तथा पचास फीसद प्रदेश जीएसटी के रूप में लगता है। इसमें प्रदेश जीएसटी समाप्त होने से उत्पादों की कीमत बाजार के मुकाबले काफी कम हो जाएगी।

 

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