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दि राइजिंग न्यूज़

संजय़ शुक्ल

लखनऊ।    

 

कागजों पर मुनाफे के दावे करने वाला उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) अब घपले–घोटाले का केंद्र बन गया है। पिछले दिनों ईटीएम में छेड़छाड़ कर टिकट का पैसा गायब करने के मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है कि अब आनलाइन टिकट बुकिंग मे घपला सामने आ गया है। खास बात यह है कि इसमें टिकट तो जारी हुए लेकिन रोडवेज को उसका पैसा नहीं मिला। इसकी प्राथमिकी भी दर्ज करा दी गई है और देखने वाली बात यह है कि जांच में क्या निकलता है।

 

वैसे रोडवेज में जांच का मतलब मामले को ठंडे बस्ते में डालने की प्रक्रिया भर माना जाता है। पिछले पांच सालों में नजर डाले तो बस की सीट, ग्रीस, लाइट से लेकर कर्मचारियों की तैनाती तक बंपर अनियमितताएं हुईं। जांच में दोष सिद्ध हुआ और कार्रवाई की संस्तुति भी हुई लेकिन कार्रवाई होने के पहले फाइलें गायब हो गईं। खास बात यह है कि रोडवेज को इन घोटालों से करोड़ों रुपये की चपत लगी लेकिन अधिकारी अपनी जेब भरने में ही लगे रहें। अधिकारियों का काकस इतना मजबूत है कि बरेली में आफ लाइन भर्ती करने के मामले में निलंबित अधिकारी दोबारा क्षेत्रीय प्रबंधक पद पर तैनाती भी पा चुके हैं। इसके पहले चित्रकूट में भी संविदा कर्मियों की भर्ती में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। आरोपित अधिकारी को मुख्यालय सम्बद्ध किया गया था लेकिन अब वह मुख्यालय पर प्रभावशाली पद को सुशोभित कर रहे हैं।

खास बात यह है कि पिछले दिनों बसों में टिकट बनाने वाली ईटीएम के रिकार्ड से छेड़छाड़ कर सरकारी पैसे के गबन का मामला सामने आया। मुख्य महाप्रबंधक एचएस गाबा ने इसे गंभीर मसला मानते हुए जांच के आदेश दिए लेकिन करीब चार हफ्ते बाद भी अभी मास्टर कंप्यूटर के रिकार्ड मुख्यालय तक नहीं पहुंचे हैं। यह जांच अभी चल रही कि अब आनलाइन बुकिंग के पैसे में घालमेल सामने आ गया है। अब इसे एचडीएफसी बैंक के गेटवे से आई दिक्कत की शक्ल दी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक यात्रियों के आनलाइन टिकट तो जारी किए गए लेकिन उनका पैसा रोडवेज के खाते में नहीं पहुंचा।

 

खास बात यह है कि गेटवे पेमेंट का प्रकरण कुछ साल पहले तक रोडवेज में आनलाइन टिकट बुकिंग करने वाली कंपनी अभिबस के साथ  भी देखने को मिली थी। रोडवेज का करोड़ों रुपये कंपनी के पास फंस गया था और उसे वापस पाने के लिए भी रोडवेज को कई साल इंतजार करना पड़ा था। यह मामला भी एक साल पहले समाप्त हुआ।

अभी बस में गेटवे बना ही नहीं था। इस कारण से दिक्कत हुई थी। यहां पर एचडीएफसी बैंक का गेटवे है और कई बार आनलाइन पैसे के ट्रांजेक्शन पर 36 घंटे तक लग जाते हैं। इसकी जांच आडिट टीम द्वारा की जा रही है। वैसे फिलहाल इसमें किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

एचएस गाबा

मुख्य महाप्रबंधक

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