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जेब भरने का जरिया बना कूड़ा प्रबंधन

Lucknow | Last Updated : May 16, 2018 11:40 AM IST

 

  • कंपनी बदली मगर हालात पहले जैसे

  • कई जगह मुख्य मार्गों पर ढेर रहता है कूड़ा


Dust All Over in Lucknow


दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ और सड़क पर ढेर कूड़ा। राजधानी में यह आपको हर क्षेत्र में देखने को मिलेगा। क्या आईटी चौराहा और क्या मुंशापुलिया चौराहा। सीतापुर रोड हो या सुभाष मार्ग, हर जगह कूड़े का ढेर दिखता है। खास बात यह है कि कूड़ा निस्तारण केवल जेब भरने का जरिया बन गया है। कूड़ा निस्तारण के नाम पर करोड़ों रुपये की चपत लगाने वाली ज्योति इन्वायरो को हटाकर ईको ग्रीन कंपनी को इस काम लगाया गया लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला है। हालांकि कंपनी को भुगतान जरूर हो रहा है।

दरअसल राजधानी में कूड़ा प्रबंधन –निस्तारण के नाम पर खेल सालों से चल रहा है। पूर्व नगर आयुक्त के संरक्षण में राजधानी में कई साल तक कूड़ा निस्तारण का काम देखने वाली एजेंसी ज्योति इन्वायरो ने जमकर जेबें भरी। जब कभी कंपनी पर कार्रवाई की नौबत आई, नगर निगम के मुस्तैद अधिकारियों ने कंपनी को बचा लिया। अधिकारी कंपनी पर इतना मेहरबान थे कि नगर ने कूड़ा निस्तारण के लिए खरीदी गई गाड़ियां तक भी कंपनी को सौंप दीं। इनमें दर्जनों गाड़ियां लापता हैं। मगर इसे देखने की फुर्सत किसी अधिकारी के पास नहीं है। ज्योति इन्वायरों के बाद आने वाली एजेंसी ईको ग्रीन भी अधिकारियों के संरक्षण में पुराने ढर्रे पर है। खास बात यह है कि ईको ग्रीन में तमाम कर्मचारी पुराने ही है। उन्हीं से काम लिया जा रहा है। पहले तो कंपनी ने मैनेजर तक वही थे, जो ज्योति इन्वायरो में इसी पद पर थे।

हर चौराहे पर एकत्र हो रहा कूड़ा

कंपनी को डोर टू डोर कलेक्शन का काम दिया गया है लेकिन एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी अभी तक घरों का कूड़ा कंपनी के मुलाजिम सड़क पर ही ढेर कर रहे हैं। उसके बाद उनका निस्तारण भी सुविधानुसार होता है। इंदिरानगर, मुंशीपुलिया, महानगर अलीगंज, चौक, राजाजीपुरम, चारबाग और आलमबाग तक में यही हाल है। यहां पर दोपहर बाद तक कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। केवल वीआईपी आगमन के दौरान सफाई होती है, अन्यथा कंपनी द्वारा भी नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। खास बात यह है कि कूड़े के नियमित और व्यवस्थित निस्तारण के लिए जिम्मेदार जोनल अधिकारियो को बनाया गया है लेकिन किसी भी जोन में कूड़ा निस्तारण को लेकर जोनल अधिकारी नहीं दिखाई देते हैं। हालांकि कंपनी के बिलों का सत्यापन जरूर किया जा रहा है। इसकी वजह भी केवल कमीशनखोरी है।

"कूड़ा निस्तारण को लेकर तमाम शिकायतें मिली है। कंपनी को चेतावनी भी दी जा चुकी है। इसके अलावा जोनल अधिकारियों को भी चेताया गया। इसमें सुधार नहीं दिखता है तो जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।"

संयुक्ता भटिया

महापौर 



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