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दि राइजिंग न्यूज

सभी फोट- कुलदीप सिंह

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

आर्टीफिशियल ज्वेलरी की दुकान पर पोशाक से मैच करते कड़े और कान के टॉप्स –झाले को तलाशती नजरें। पोशाक पर जंचने वाले फुटवियर (सैंडिल –जूते)। बाजार में सजी सेविंयो की दुकान। दुकानों पर खरीदारों की भीड़ और प्रसन्नचित दुकानदार। यह नजारा अमीनाबाद, विक्टोरिया स्ट्रीट और नजीराबाद में रोज रात को देखने को मिल रहा है। बाजार भी ईद के चलते अब देर रात तक खुल रहे हैं। दिन भर रोजे के बाद इफ्तार और फिर रात में खरीदारी के लिए ग्राहकों के चलते बाजारों की रौनक दिन ब दिन बढ़ रही है।

अमीनाबाद में रात करीब मंगलवार साढ़े आठ बजे दि राइजिंग न्यूज ने इस बाजार का जायजा लिया। अमीनाबाद में जूते वाली गली के पास दुकान लगाने वाले आसिफ ने बताया कि दरअसल, दिन में रोजा व बहुत गर्मी होने के कारण लोग कम निकलते हैं। अमूमन चार बजे तक बाजारों में कम भीड़ रहती है लेकिन रात आठ बजे के बाद रौनक अचानक बढ़ती है। ईद पर रिवाज के चलते कपड़ों से साज सज्जा का तमाम सामान खरीदा जाता है। इस कारण से बाजार भी खूब चलता है।

इसी तरह से आर्टीफिशियल ज्वैलरी के व्यापारी सुमित के मुताबिक इस समय लेटेस्ट आर्टीफिशियल ज्वैलरी की मांग बहुत बढ़ जाती है। खास कर पोशाक से मैच करती ज्वैलरी की मांग ज्यादा होती है। महिलाओं को यह खासी पसंद आती है और इस कारण से इनकी बिक्री भी जमकर होती है।

ईद पर सेवियों की मांग भी खूब होती है और लखनऊ की जीरो नंबर की सेंवई तो दूर दूर तक मशहूर है। ईद पर हर घर में सेंवई बनती है और इस कारण से इसकी मांग भी बहुत ज्यादा रहती है। अमीनाबाद स्थित महिला कालेज के बाहर लगी सेंवई की बाजार पर दूर –दूर से लोग पहुंच रहे हैं। रात में खरीदारी करने निकली हिना बताती है कि रोजा और गर्मी होने के कारण दिन निकलना बहुत दिक्कत तलब होता है, इस कारण अब देर शाम या रात में खरीदारी करने सभी निकलते हैं। उनके मुताबिक ईद पर लोग अपने सामर्थ के अनुसार खरीदारी करते हैं। नमाज के कुर्ते से लेकर घर की सजावट के लिए सामान लिया जाता है।

बीस करोड़ का पटरी कारोबार

ईद के मौके पर करीब बीस करोड़ रुपये का पटरी बाजार ही होता है। पर्स, कुर्ता सूट, जूते –सैंडिल, आर्टीफिशियल ज्वैलरी, पर्दे आदि की फुटपाथ पर लगने वाली पटरी दुकानों पर ही करीब बीस करोड़ रुपये का कारोबार होता है। चांद रात के दिन यानी ईद का चांद वाली रात तो बाजार भोर तक गुलजार रहते हैं। इस दिन कारोबार भी करीब पचीस करोड़ तक पहुंच जाता है। पटरी दुकानदार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक जो सामान बड़ी दुकानों पर अधिक कीमत पर मिलता है, पटरी दुकानों पर वहीं चीज मुनासिब व सस्ते दाम पर मिल जाती है। इस कारण इसमे खरीदारी करने वालों में सभी वर्ग के लोग होते हैं।

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