FIR Registered Against Singer Abhijeet Bhattacharya For Misbehavior From Woman

दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ। 

राजधानी का नामचीन सिटी मांटेसरी स्कूल अब मनी लांड्रिंग को लेकर चर्चा में हैं। सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्कूल को विभिन्न मदों के लिए उधार देने वाले लोगों ने स्कूल पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। ये भी बताया गया है सिटी मांटेसरी स्कूल द्वारा सिख्षा के अधियमों का मजाक उड़ाया जा रहा है। पूर्व बुधवार को पीड़ित लोगों ने मार्च निकाल कर अपना उधार धन वापस मांगा था। इस संबंध में पीड़ितों ने जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल तक शिकायत दर्ज कराई है लेकिन इस प्रकरण की जांच पूरी तरह से सिटी मांटेसरी स्कूल के संस्थापक प्रबंधक जगदीश गांधी से प्रभावित दिखाई दे रही है।

 

लिहाजा कई पीड़ित लोग अब न्यायालय के जरिए अपनी रिपोर्ट दर्ज करा रहे हैं। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में सोशलिस्ट पार्टी के सदस्यों व पीड़ित लोगों ने सिटी मांटेसरी पर फ्राड करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि स्कूल बिना आरबीआई, सेबी और आयकर विभाग की जानकारी के ही बैंक चला रहा था और यह अपने आप में अपराध है। इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए।

सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता एवं समाजसेवी संदीप पांडेय के मुताबिक स्कूल द्वारा बड़े पैमाने मनी लांड्रिंग की गई। लोगों से करोड़ो रुपये लेकर उन्हें एक साल बाद की रसीद दी गई। रसीद पर सिटी मांटेसरी स्कूल चौक शाखा के लेटरहेड और प्रधानाचार्य के मुहर लगे हैं। यह सिलसिला एक दशक से अधिक समय से चल रहा है और अब संस्थापक प्रबंधक इसे पूर्व प्रधानाचार्या का फर्जीवाड़ा करार दे रहे हैं। एक तरफ वह पूरे फ्राड के पीछे पूर्व प्रधानाचार्या को दोषी करार दे रहे हैं और दूसरी तरफ केवल पूर्व प्रधानाचार्य को बर्खास्त कर मामले से पल्ला झाड़ लिया। यही नहीं, इस संबंध में पूर्व पुलिस प्रमुख को सिटी मांटेसरी प्रबंधन ने पत्र भेजा लेकिन करीब एक साल गुजरने के बाद भी इस पत्र पर रत्ती मात्र जांच न होना दाल में काल होने का इशारा करता है। उन्होंने कहा कि स्कूल को उधार पैसा देने वाले अभी काफी लोग सामने नहीं आए हैं और यह रकम 25 करोड़ से अधिक की हो सकती है।

 

पत्रकार वार्ता में स्कूल को समय समय पर करोड़ों रुपये उधार देने वाले तमाम लोग भी सामने आए और उन्होंने बताया कि किस तरह से स्कूल ने नोटबंदी के बाद उनका सारा पैसा हजम कर लिया। भुक्तभोगियों के मुताबिक कई लोगों को तो प्रवर्तन निदेशालय की जांच चलने का बहाना बताया गया तो कुछ स्कूल की मुख्य शाखा में हो रही अन्य जांचों के कारण कुछ समय बाद पैसा देने का आश्वासन दिया गया था। बाद में सबसे पल्ला झाड़ लिया गया।

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