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बीमार चालक, खटारा बसें और बेबस मुसाफिर

Lucknow | Last Updated : Jan 22, 2018 07:07 PM IST

 

  • हाल-ए-रोडवेज  

  • जान हथेली पर लेकर सफर कर रहे हैं मुसाफिर

  • कमीशनखोरी में बदहाल अनुबंधित बसें भर रहीं फर्राटा


Conditions of Roadways Buses in Lucknow City


दि राइजिंग न्‍यूज

विकास वाजपेयी

लखनऊ।

 

यूपी 33 टी-3564 लखनउ से लखीमपुर-धौराहरा,यूपी 34 टी-4456 लखनउ से बिसवां के अलावा यूपी 31 टी 4071 पर सीट की जगह कहीं पर चमडा तो कहीं पर सीट के एंगल ही दिखाई दे रहें है मगर यात्रियों के बैठने के लिए जगह नहीं है। उक्‍त नम्‍बर वाली बसें सामने से जर्जर हो चुकी है। किसी की दोनों हेडलाइट टूटी हुयी है तो किसी बस में सीट की जगह चमडा दिखाई दे रहा है। बसों की हालत देखकर लगता है कि बीते कई महीनों से इनकी मरम्‍मत नही करायी गयी है। वहीं दूसरी तरह यात्री भी इन्‍ही बसों में सफर करने को मजबूर है।

अब जरा दूसरा पक्ष देखिए। रोडवेज में एक तिहाई चालकों की नजरें कमजोर हैं। दो दर्जन से ज्यादा ऐसे चालक हैं जिनकी रोशनी होना और न होना बराबर है। रक्तचाप का शिकार हैं मगर बसें दौड़ा रहे हैं। मगर रोडवेज की सेहत पर फर्क नहीं है। इन चालकों के भरोसे हजारों लोग रोज सफर कर रहे हैं। अब रोडवेज ऐसे चालकों को चश्मा वितरित करने जा रहा है, जिनकी नजरें कमजोर हैं। मगर सवाल यह है कि आखिर यात्रियों की सुरक्षा कब देखी जाएगी।

ऐसा तब है कि जबकि हर महीनें लाखों रुपये बसों के रखरखाव पर फूंके जा रहे हैं। अधिकारी दम भरते नहीं थकते कि बस अड्डे से बसों के निकलने से पहले उनकी जांच सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक – क्षेत्रीय प्रबंधक करते हैं। जिम्मेदारी भी उनकी है कि खटारा बसें क्यों संचालित हो रही है लेकिन कार्रवाई केवल जुबानी भर होती है।

जहां कमीशन वहीं काम

परिवहन निगम प्रबंधन साधारण बसों की मरम्‍मत कराने के वातानुकूलित बसों का बेड़ा बढाये जाने पर ध्‍यान दे रहा है। यह अलग बात है कि मुसाफिरों की कमी से जूझ रही इन हाईएंड बसों में किराया भी कम किया जा रहा है लेकिन जिन बसों से रोडवेज के नब्बे फीसद मुसाफिर सफर कर रहे हैं, उनकी हालत दयनीय हैं। इसकी ओर कोई ध्यान देने को भी तैयार नहीं है।

सीधे तौर पर अधिकारी जिम्मेदार

लखनऊ क्षेत्र के सेवा प्रबंधक सत्यनारायण खटारा बसों के लिए सीधे तौर पर आरएम व एआरएम को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनके मुताबिक बस अड्डे से इन आउट होने वाली बसों की निगरानी करना तथा उनकी हालत के लिए यही अधिकारी जिम्मेदार हैं। इसके लिए इन अधिकारियों को पत्र जारी किया जा रहा है और उससे मुख्यालय को भी अवगत कराया जाएगा।



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