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दि राइजिंग न्‍यूज

साशा सौवीर/कुलदीप सिंह

लखनऊ।

 

जहां देश महान बनने की बात लिखी थी, उन्‍हीं दीवारों से पानी बह रहा था। दरी बिछा के जहां बच्‍चों ने किताबें खोली, वह जमीन भीगी थी। यह मंदिरों का हाल है। चौंकिए मत, हम देवताओं की मूर्ति वाले मंदिर की बात नहीं कर रहे, हम शिक्षा के मंदिर की बात कर रहे हैं यानि कि प्राथमिक विद्यालय।

बारिश के मौसम में शिक्षा के इन मंदिरों की क्‍या गत हो चुकी है, यह टेढ़ी पुलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में साफ दिखा। वहीं, बीएसए लगता है बात करने के मूड में ही नहीं है। जाहिर है, जब अधिकारियों का ये हाल है तो स्‍कूल परिसर तो चौपट होगा ही।

गुरुवार को दि राइजिंग न्‍यूज की टीम यहां पहुंची तो यहां के हालात चौंकाने वाले थे।

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास कर भी रही है या केवल हाथी के दांत दिखाने वाले ही हैं? इस रिपोर्ट को पढ़कर, बदहाली की फोटोज़ व वीडियोज़ को देखकर आपके ज़हन में यही सवाल कौंधेगा।

 

 

दि राइजिंग न्‍यूज की टीम सुबह साढ़े सात बजे जब यहां पहुंची तो स्‍कूल के सामने पानी लबालब भरा था, और पूरे जूते धसने लायक कीचड़ भरा हुआ था।

 

 

बच्‍चे व शिक्षक किस प्रकार स्‍कूल तक पहुंचते हैं आप इन तस्‍वीरों से अंदाजा लगा सकते हैं।

 

 

 

सांडों की लड़ाई में सहमे थे बच्‍चे

 

 

 

महज चार दिन पहले दो सांडों की लड़ाई ने विद्यालय के बच्‍चों के मन में दहशत बना दी। बाकायदा लड़ते-लड़ते परिसर तक पहुंच गए सांड। शिक्षिका रुचि ने बताया कि उस वक्‍त मध्‍य भोज का समय था। सभी बच्‍चे खाना खा रहे थे जब अचानक सांडों की लड़ाई शुरू हो गई। बच्‍चे डर गए। किसी तरह शिक्षिकाओं ने सभी विद्यार्थियों को क्‍लासरूम में बंद किया। करीब एक घंटा सहमे हुए सभी बच्‍चे क्‍लास में बंद रहे।

 

 

इंचार्ज कामना श्रीवास्‍तव की मानें तो स्‍कूल में बाउंड्रीवॉल न होने से यहां अराजकतत्‍व भी मंडराते रहते हैं। कई बार लोग बीढ़ी व मदिरा पीकर यहां चक्‍कर लगाने लगते हैं। चूंकि विद्यालय में केवल महिला स्‍टाफ ही है इस कारण यह एक बहुत बड़ी समस्‍या है।

कामना कई दफा खंड शिक्षा अधिकारी को बाउंड्रीवॉल बनवाने व जर्जर इमारत की मरम्‍मत की गुजारिश लिखित रूप से कर चुकी हैं। एक दिसंबर 2016 को उन्‍होंने पहला पत्र भेजा और उसके बाद से कई पत्र भेजे जा चुके हैं। हालांकि, उनकी पुकार अभी अनसुनी है।

बेसिक शिक्षक अधिकारी डॉ. अमर कांत सिंह फोन पर बात ही नहीं कर रहे। तमाम कॉल के बाद भी उनसे बात नहीं हो पाई।

इन तस्‍वीरों को देखिए और खुद ही अंदाजा लगाइए कि कैसे पढ़ेंगे और कैसे बढ़ेंगे बच्‍चे।

 

 

 

 

 

 

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