Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज

सभी फोटो- कुलदीप सिंह 

लखनऊ।

 

करीब डेढ़ सौ वर्गफीट का कमरा। ऊपर छत से टूट कर गिरता प्लास्टर और नीचे दर्जनों बच्चे पढ़ाई करते। कमरे में एक बल्ब लेकिन पंखा गायब। अक्सर छत का प्लास्टर नीचे बच्चों पर या शिक्षिकों पर गिरता है लेकिन इसकी सुध लेने वाला को नहीं है। दरअसल प्राथमिकी विद्यालयों की बदहाली कहीं छिपी नहीं है लेकिन राजधानी में ही जब ऐसे स्कूल हैं तो बाकी प्रदेश के हाल का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

राजधानी के गाजीपुर में स्थित बलरामनगर में प्राथमिकी विद्यालय की हालत सालों से बदहाल है। विद्यालय में कहने को बिजली है लेकिन केवल एक कमरे के लिए। स्कूल का भवन जर्जर हो चुका है और चारों पर गंदगी का अंबार है। यहां तक बच्चों को शौच के लिए भी बाहर जाना पड़ता है। यही नहीं अक्सर तमाम सुअर तक विद्यालय में ही डेरा जमा लेते हैं। इस गंदगी –बदहाली में ही बच्चे अपना भविष्य संवार रहे हैं। मुख्यमंत्री शिक्षा स्तर ऊंचा करने की दलील देते नहीं थक रहे लेकिन हालात उनके तमाम दावों की हवा निकाल रहे हैं।

स्कूल शिक्षिका के मुताबिक इस बावत कई बार क्षेत्रीय पार्षद व बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा गया। पार्षद स्कूल को गोद देने की दलील देते हैं तो बीएसए मामले को संज्ञान मे लेकर कार्रवाई करने का दम भरते हैं लेकिन इन बच्चों को मूलभूत सुविधा कब मिलेगी, फिलहाल यह तय नहीं है।

"यह प्रकरण मेरे में संज्ञान में नहीं था। इसकी जांच कराई जाएगी और इसमें अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी।"

अमरकांत त्रिपाठी

बेसिक शिक्षा अधिकारी 

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