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दि राइजिंग न्‍यूज

शैलेंद्र सिंह/कुलदीप सिंह

लखनऊ।

 

चारों तरफ अंधेरा... परिसर में गंदगी और मुख्‍य द्वार की खस्‍ता हालत... ये तस्वीर है जानकीपुरम गार्डेन स्थित प्रा. विद्यालय गोड़ियन पुरवा की। जी हां, केंद्र व प्रदेश में स्थित सरकार के दावों की पोल यहां के स्‍कूल में अंधेरे में अपने भविष्‍य का उजाला ढ़ूंढ़ रहे बच्‍चे खोल रहे हैं। बता दें कि सरकारी स्कूलों का हाल जानने दि राइजिंग न्यूज की टीम शहर के प्राथमिक विद्यालयों के चक्कर लगा रही है।

बीते गुरुवार को टीम ने टेढ़ी पुलिया के प्राथमिक विद्यालय का जायजा लिया था जहां “बद से बदतर हो रहे हैं स्कूल... BSA बात करने के मूड में नहीं” बुरी गत थी। शुक्रवार को टीम कुर्सी रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंची थी, जहां “स्‍कूल है या मजाक...यहां गाय-सांड का दंगल चलता है” की स्थिति दयनीय थी। इसी क्रम में टीम मंगलवार को म‍ड़ियांव थाना क्षेत्र के जानकीपुरम गार्डेन स्थित गोड़ियन पुरवा के प्राथमिक विद्यालय पहुंची। आइए आपको दिखाते हैं इस 88 बच्चों वाले शिक्षा के मंदिर की तस्वीर...

 

 

स्थिति सुधारने में जुटे थे बच्‍चे

शुरुआती तस्वीर हैरान करने वाली आई। विद्यालय के मुख्‍य द्वार की हालत बदतर थी, जिससे छोटे जानवर आसानी से परिसर में प्रवेश कर सकते थे। इस गेट की दुर्दशा को सुधारने का जिम्‍मा बच्‍चों ने खुद ही अपने हाथों में ले रखा था। यहां तक की स्‍कूल में साफ-सफाई करने व झाड़ू लगाने का काम भी बच्‍चे खुद करते हैं। विद्यालय में तैनात शिक्षिका के मुताबिक, इस बात की शिकायत नगर निगम व सभासद से की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। जिस दिन शिकायत की जाती है केवल उसी दिन सफाईकर्मी भेजा जाता है।

 

 

 

अंधेरे में पढ़ाई करके संवार रहे भविष्‍य        

विद्यालय के कक्ष में प्रवेश करने पर वहां का जो नजारा सामने आया वो चौंकाने वाला था। यहां की तस्‍वीर ने केंद्र व प्रदेश की सरकार के हर गांव के हर घर तक बिजली पहुंचाने के दावों की पोल खोल दी। पीएम मोदी की “सौभाग्‍य योजना” व सीएम योगी की “स्टडी सौर ऊर्जा लैंप योजना” उस समय धुंधली दिखाई दी जब बच्‍चे अपनी किताबों के अक्षर पढ़ने के लिए कक्ष के दरवाजे का सहारा लेते दिखाई दिए। स्‍कूल कक्ष में वा‍यरिंग तो की गई है, लेकिन सिर्फ नाम के लिए। बिजली तो कभी यहां तक पहुंची ही नहीं और बच्‍चे अंधेरे में ही पढ़कर अपना भविष्‍य संवारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कमरे में पंखे न लगे होने से शिक्षिका व बच्‍चे गर्मी से भी परेशान हो जाते हैं।   

 

 

  

 

 

  

 

 

35 साल से बिजली नहीं

विद्यालय निमार्ण के लिए सरकार को अपनी जमीन देने वाले मो. सपूर (उस समय ग्राम प्रधान, म‍ड़ियांव) ने बताया कि विद्यालय को जमीन दिए और इसके निर्माण को लगभग 35 साल हो चुके हैं, लेकिन बिजली यहां अब तक नहीं पहुंची। वहीं, विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र अध्‍यापिका बिंदेश्‍वरी वर्मा ने बताया कि बीते साल चुनाव के वक्‍त स्‍कूल में वायरिंग की गई थी और बोला गया था कि 10-15 दिन में बिजली आ जाएगी, जो आजतक नहीं आई है। अंधेरे में बच्‍चों को पढ़ने और हम लोगों को पढ़ाने दोनों में ही समस्‍याएं आती हैं।

 

 

 

 

टंकी में पानी नहीं, नल से निकल रहे कीड़े

स्‍कूल में पानी का मोटर भी लगा है और टंकी भी मौजूद हैं, लेकिन बस देखने के लिए। बिजली न आने के कारण मोटर लगा-लगा जंग खा रहा है और पानी की टंकी भी खराब हो रही हैं। बच्‍चे स्‍कूल में लगे नल के पानी इस्‍तेमाल करने से भी दूर भागते हैं, क्‍योंकि उस पानी में कीड़े निकलते हैं। सभी बच्‍चे पाने का पानी अपने घर से बोतल में लेकर आते हैं।   

 

 

 

 

तीन टीचर्स में से एक के ऊपर पूरा भार

स्कूल में दो शिक्षामित्रों के साथ कुल तीन टीचर्स की तैनाती है, जिसमें इंचार्ज छुट्टी पर गई हुई हैं और दूसरी अध्‍यापिका बीएलओ की ड्यूटी पर। ऐसे में केवल एक शिक्षिका अकेले ही पूरा काम संभाल रही है। 

 

 

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