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गोमती रिवरफ्रंट घोटाले की जांच करेगी सीबीआई

Lucknow | Last Updated : Jun 20, 2017 11:53 AM IST

  • कई नौकरशाहों व अभियंताओं की उड़ी नींदें

   
cm yogi recommends cbi probe in case of gomti river front

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।


गोमती रिवर फ्रंट की जांच कमेटी के सामने खुद को पाक-साफ और केवल सुपरवाइजिंग अधिकारी करार देने वाले नौकरशाहों की नींद उड़ गई हैं। वजह है कि खन्ना कमेटी की रिपोर्ट पर सरकार ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि गोमती रिवर फ्रंट योजना पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसके लिए करीब 650 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे लेकिन बाद में यह योजना घोटाले की भेंट चढ़ गई। अब प्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की है।

 

सरकारी सूत्रों के मुताबिक नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अगुवाई में बनी टीम ने जांच में पाया कि योजना की लागत करीब तीन गुना बढ़ गई। अब तक इस योजना पर 1550 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं जबकि काम करीब साठ फीसद ही हुआ है। मुख्य बात यह है कि गोमती में गिरने वाले नाले को बंद करने के लिए कुछ किया ही नहीं गया और वह वैसे ही गोमती में गिर रहे हैं। जबकि ऊंचे दामों पर सामान मंगाकर अधिकारियों-अभियंताओं ने खूब जेब भरीं। 




प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद ही रिवर फ्रंट घोटाले की जांच की बात शुरू हो गई थी और अब सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच की घोषणा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक इसकी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी।

     

नौकरशाहों की भूमिका संदिग्ध

गोमती रिवर फ्रंट योजना में पूर्व सरकार में दो मुख्य सचिव सहित कई नौकरशाहों की भूमिका संदिग्ध हैं। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन तथा दीपक सिंघल को जांच कमेटी ने तलब किया था। हालांकि दोनों मुख्य सचिवों ने खुद को पूरे प्रकरण से दूर बताया था और अपनी भूमिका को सीमित करार दिया था। खास बात यह है कि गोमती रिवर फ्रंट की साज सज्जा से लेकर लाइटिंग को लेकर नौकरशाहों-अधिकारियों व अभियंताओं ने कई विदेशी दौरे किए।

महंगे फौव्वारें, लाइटें खरीदीं गई। यही नहीं, काम के लिए टेंडर में भी कई दागियों कंपनियों को दिए गए। इसके पीछे भी नौकरशाहों की भूमिका थी। अब सीबीआई जांच में यह सारी हकीकत सामने आने की संभावना प्रबल हो गई है। इस कारण से एलडीए, सिंचाई विभाग से लेकर सचिवालय में तैनात अधिकारियों की नींद उड़ गई है।

   

ध्वस्त हो गया गोमती बैराज

गोमती रिवर फ्रंट योजना में सबसे बड़ा खेल गोमती बैराज के साथ हुआ। बैराज के नीचे गोमती तट बंध पर रोड बनाने में की गई लापरवाही के चलते गोमती बैराज ही धसक गया। आलम यह है कि पिछले करीब दस महीने से यह बैराज बंद हो गया है। दोनों तरफ से धसक चुके इस बैराज को दुरुस्त कराने के लिए कोई काम नहीं किया गया। केवल जांच का नाटक होता रहा। 

खास बात यह है कि इसके लिए मुख्य रूप से सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एवं पूर्व सिंचाई एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव के नजदीक रूप सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराया गया। वह सेवानिवृत्त भी हो गए लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। बैराज बंद हो जाने के कारण हजारों लोगों को अब 1090 चौराहे समता मूलक चौराहे तक जाकर घूमना पड़ता है मगर इसकी सुध किसी ने नहीं ली।  

 


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