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ड्रीम प्रोजेक्टों में सीबीआई

Lucknow | 20-Jun-2017 12:44:41 PM
            
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  • गोमती रिवर फ्रंट के बाद अब हुसैनाबाद और जेपीएनआईसी पर भी सीबीआई जांच का साया
  • मंडलायुक्त की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार

cbi investigation of husainabad and jpnic

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

    

समाजवादी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में विलेन के रूप में अब सीबीआई दिख रही है। दरअसल, पूर्ववर्ती सरकार ने भी इन प्रोजेक्ट के इस हश्र की कल्पना शायद नहीं की थी लेकिन इससे भले लोगों को अब तक भला न हुआ लेकिन सीबीआई की आमद ने इन प्रोजेक्टों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार ने गोमती रिवर फ्रंट की जांच के आदेश दे दिए हैं और इसमें सिंचाई विभाग द्वारा आठ अधिकारियों-अभियंताओं पर एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है। अब जनेश्वर मिश्र पार्क, हुसैनाबाद सौंदर्यीकरण और जेपीएनआईसी योजना पर भी सीबीआई जांच का साया दिखाई देने लगा है।

 

दरअसल, हुसैनाबाद सौंदर्यीकरण योजना में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्‍ट्राचार के साक्ष्य मिल चुके हैं। यहां पर भी बिना पुरातत्व विभाग की एनओसी ही पूरी रोड पर काबल स्टोन लगा दिए गए। यही नहीं, करोड़ों रुपये की एलईडी इमामबाड़े से लेकर छोटे इमामबाड़े तक खंभे पर लटकी हुई है जबकि इनका प्रसारण एक दिन भी नहीं हुआ। करीब अस्सी लाख रुपये खर्च कर घंटाघर की घड़ी को ठीक कराया गया लेकिन अक्सर यह बंद ही रहती है। इस पूरे मामले की जांच आवास मंत्री सुरेश पासी ने की थी। 

उन्होंने तो यहां सड़क पर बिछे पत्थरों को खोद कर भी देखा था और उसमें नीचे कंक्रीट के स्थान पर बालू मिली थी। इसी तरह से जेपीएनआईसी में मंत्री को जांच में लिफ्ट ही नहीं चलती मिली थी। यही नहीं, यहां पर करोड़ों रुपये एलीवेशन के लिए खर्च किए गए थे लेकिन सारा काम आधा अधूरा था।

 

पूरे मामले की तकनीकी जांच मंडलायुक्त को दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक यह जांच भी पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसकी जांच रिपोर्ट शासन तक पहुंच जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद इन दोनों योजनाओं की भी सीबीआई जांच की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, इन तीनों ही योजनाओं में स्वीकृत राशि से डेढ़ से दो गुना तक ज्यादा पैसा खर्चा गया। मगर इनका काम भी पूरा नहीं हुआ है। 

यही नहीं, हुसैनाबाद से परिवर्तन चौक तक करीब 37 करोड़ की स्ट्रीट लाइटें लगा दी गई लेकिन उसके लिए नगर निगम से अनुमति तक नहीं ली गई थी। आलम यह था कि पूरे मार्ग पर तीन-चार मीटर की दूरी पर स्ट्रीट लाइटें लग गई थीं और कोई इसका जवाब देने को तैयार नहीं था।

 

पूर्व सरकार के चहेते अभियंताओं का कारनामा

बिना अनुमति स्ट्रीट लाइटें लगवाने, ऐतिहासिक रूमी गेट व इमामबाड़े के लेवल को दरकिनार कर उस पर पत्थर लगवाने तथा दोगुने दाम पर एलईडी लाइटें खरीदने वाले अभियंता पूर्व सरकार के चहेते थे। इनमें एक अधिशासी अभियंता तो गायत्री प्रजापति के अवैध निर्माण को संरक्षण के देने मामले में चिन्हित हो चुके हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भी भेजा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक केवल कमीशन की खातिर स्ट्रीट लाइटें चौक चौराहा, परिवर्तन चौक तक लगवा दी गईं। मकसद केवल इन्हें खपाना दिखाई देता है। 


वास्तविकता यह है कि इस मुख्य मार्ग पर लाइटें बदल गई हैं लेकिन शाहमीना तिराहे से मेडिकल कालेज, डालीगंज पुल से फैजाबाद रोड पर लाइटें पुरानी ही लगीं है। अब ऐसा क्यों हुआ, इसकी भी जानकारी कोई देने के तैयार नहीं है। यही नहीं, इस परियोजना के उद्घाटन के वक्त जो लाइटें लगी थीं, वह सीजी सिटी की थीं। जबकि विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही लाइटें बदलने लगी और ये सारा काम दिन-रात किया गया।  


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