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शहर में जानवरों की फौज

Lucknow | 08-Nov-2017 12:50:56 | Posted by - Admin
  • हर एक किलोमीटर पर 12 गायें
   
Case of Stray Animals in Lucknow City

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ। 

 

सूबे में योगी सरकार के गठन के बाद जिस तरह से अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाइयों का दौर शुरू हुआ, प्रदेशभर में कथित गोरक्षकों की संख्या बढ़ती चली गई थी। कुछ घटनाएं ऐसी हो गईं कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री को यह कहना पड़ा कि गोरक्षक कानून को अपने हाथों में ना लें।

बीते दिन अयोध्या के दौरे पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोरक्षा के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर सरकार गौरक्षा का काम कर रही है तो आखिर सड़कों पर गायों की संख्या क्यों बढ़ती जा रही है? क्यों नहीं इस पर कोई गोरक्षक आगे आता? 


 

इस मुद्दे पर दि राइजिंग न्‍यूज ने शहर का रियलिटी चेक किया। इसमें सामने आया कि सिर्फ एक किलोमीटर के दायरे में ही 12 गाय सड़क पर खुलेआम घूम रही हैं। इससे यातायात तो प्रभावित हो ही रहा है साथ ही लोगों को भी कई बार जान-माल का खतरा हो जाता है। जानवर भी शहर के अंदर खचरे के ढेर में पॉलीथिन पर गुज़ारा करते हैं, नतीजन उनकी जान भी जोखिम में है। 

 

 

पड़ताल 

दि राइजिंग न्‍यूज की पड़ताल में सामने आया कि राजधानी में जिन स्थानों पर गाय और अन्य पशुओं को रखा जाता है वह पहले से ही ओवरलोडेड हैं। प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में से एक कान्हा उपवन  में 1200 गाय रखने की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में वहां 1600 गाय हैं। लक्ष्मण गौशाला में 500 सौ गाय रखने की जगह है, लेकिन यहां भी लगभग 900 गाय हैं।

नगर निगम के आठ कांजी हाउस में से चार ही संचालित हैं जहां पर 25 गाय रखी जा सकती हैं, लेकिन वहां भी 35 से 40 गाय रखी जा रही हैं। गोशालाओं में ऐसी बढ़ी संख्या के बाद भी राजधानी के ज़ोन आठ में लोकबंधु हॉस्पिटल के पास एक किलोमीटर के दायरे में ही 12 गाय/सांड सड़क पर घूम रही हैं। 

 

 

कुछ क्षेत्रों में तो स्थिति और भी बदत्‍तर है। इनमें हजरतगंज, गोमती नगर, पत्रकारपुरम, आशियाना जैसे पॉश इलाके शामिल हैं। कई इलाकों में अवैध डेयरियों का संचालन भी धड़ल्ले से हो रहा है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद कुछ दिन खानापूर्ति के तौर पर अभियान तो चला लेकिन नतीजे सिफर ही रहे। स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए प्रमुख सचिव ने भी सड़क पर घूम रहे आवारा जानवरों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। 

 

कान्हा उपवन के मैनेजर यतीन्द्र मिश्रा ने बताया कि फंड न मिलने के चलते 31 मार्च के बाद से कोई गाय नहीं ली गई है। लक्ष्मण गोशाला का संचालन देख रहे गजेंद्र कहते हैं कि हमारे यहां पहले ही अधिक संख्या में गाय हैं। किसी आपातकालीन स्थिति में और पशुओं को लिया जाता है। 

 

कोर्ट के आदेशों का सिर्फ दिखावा 

एनिमल वेलफयर बोर्ड की मेंबर कामना पांडेय ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम आवारा जानवरों को पकड़ कर सिर्फ अपनी पीट थपथपाता है। कोर्ट द्वारा स्पष्ट रूप कहा गया है कि जो बार-बार शहर में गायों को खुला छोड़ते हैं उन्हें जेल तक भेजा जा सकता है। जेल तो दूर निगम शहर से अवैध डेरियों को भी नहीं हटवा पाया है। जबतक शहर  की सीमाओं से अवैध डेरी नहीं हटेंगी ये समस्या दूर नहीं होगी। 

 

 

लखनऊ नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी एके राव का दावा है कि हर दिन 10 से 15 गाय कान्हा उपवन और गोशाला भेजी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कांजी हाउस में गायों को छोड़ दिया जाता है। शहर में चल रहे अवैध डेरियों को 7 दिन की मोहलत दी गयी है।

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