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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

   

करीब 87.40 फीसद अंक के साथ दसवीं परीक्षा पास करने वाले साहिल के लिए 12वीं की पढ़ाई मुश्किल दिखाई दे रही है। सिटी मांटेसरी स्कूल में पढ़ने वाले साहिल की ग्यारहवीं क्लास में फीस माफ हो गई थी, लेकिन बारहवीं में स्कूल प्रबंधन ने फीस माफ करने से इंकार कर दिया। स्कूल के इस रुख के बाद परेशान साहिल के अभिभावक अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट को अपनी पूरी समस्या बता कर मदद की गुहार लगाई है।

सिटी मजिस्ट्रेट ने भी होनहर बच्चे के भविष्य को देखते हुए स्कूल प्रबंधन को इस प्रकरण का निदान करने के निर्देश दिए हैं। सवाल यह है कि सरकार के तमाम दावों के बावजूद बच्चे ऐसे पढ़ेंगे तो फिर वह क्या शिक्षा पाएंगे।  

 

 

सिटी मजिस्ट्रेट के यहां शिकायत लेकर पहुंची छात्र साहिल की मां रागिनी पाल ने कहा है कि उनके पति व्यापार करते हैं। साहिल पहली कक्षा से सिटी मांटेसरी स्कूल में पढ़ रहा था। कारोबार ठीक चलने के कारण आठवीं तक साहिल रिफंडेबिल स्कीम के तहत स्कूल में शिक्षा पाता रहा। इसके एवज में स्कूल को एकमुश्त लाखों रुपये दिए गए। कक्षा नौ व दस में पूरी फीस देकर बच्चा स्कूल गया। इसके बाद कारोबार की स्थिति खराब होने के कारण 11वीं में स्कूल ने फीस माफ कर दी थी। अब जब बच्चा अंतिम वर्ष में है तो स्कूल ने फीस माफ करने से इंकार कर दिया है। ऐसे में बच्चे के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। खास बात यह कि स्कूल प्रबंधन रिफंडेबिल स्कीम से हमेशा से इंकार करता रहा है।

 

करीब सवा सात हजार रुपये हैं मासिक फीस

सिटी मांटेसरी स्कूल में कक्षा 12 में पढ़ रहे साहिल की फीस करीब सवा सात हजार रुपये मासिक है यानी की साल करीब 75 हजार रुपये फीस और कापी-किताब ड्रेस आदि अलग से। हालांकि इस प्रकरण में एक परिवार से फीस माफ कराने के लिए प्रशासन से सहयोग और स्कूल प्रबंधन की हठधर्मिता की शिकायत की है, लेकिन इससे तमाम निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली की तस्वीर भी सामने आ जाती हैं।

अमीनाबाद के ही एक अभिभावक ने बताया कि प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री ज्यादा फीस वसूली पर अंकुश लगाने का दम भरते रहे, लेकिन जिस स्कूल की शिकायत हुई है, वहां पर ट्यूशन फीस में भी बीस फीसद तक इजाफा कर दिया गया।

 

 

"पीड़ित अभिभावकों ने स्कूल की बावत अपनी शिकायत दी थी। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन को  प्रकरण निस्तारित करने को कहा गया है। यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि बच्चे की शिक्षा प्रभावित न होने पाएं।" 

विवेक श्रीवास्तव

सिटी मजिस्ट्रेट 

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