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निजी कम्‍पनियों पर निर्भरता, उपभोक्ताओं की मुसीबत 

Lucknow | 09-Nov-2017 16:10:21 | Posted by - Admin
  • लेसा की बिलिंग व्यवस्था निजी कम्‍पनियों पर निर्भर 
  • ग्रामीण इलाकों में महीनों बाद भेजा जाता है बिल
   
Case of Lesa Billing System in Lucknow City

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।  

 

बिजली उपभोक्ताओं को बिल जमा करने में दिक्कतें न हों इसके लिए पावर कॉरपोरेशन बिलों की छपाई, मीटर रीडिंग व बिल जमा करने तक निजी कम्‍पनियों पर प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च तो कर रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को बिल जमा करने में होने वाली दिक्कतों से निजात नहीं मिल पा रही है।

हालत यह हो गई है कि निजी कम्‍पनी के कर्मचारी उपभोक्ताओं से वसूली करने में जुटे हुए हैं। कहीं पर मीटर के नाम पर तो कहीं पर बिल ठीक कराने या फिर लोड बढ़ाने के नाम पर वसूली जारी है।

 

 

शहरी इलाकों में निजी कम्‍पनियों के कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ताओं से वसूली के कई मामले प्रकाश में आते ही रहते हैं। निजी कर्मचारियों की मनमानी से जहां उपभोक्ताओं का अवैध वसूली से शोषण हो रहा है तो वहीं विभाग को भी लाखों रुपये प्रतिमाह का नुकसान हो रहा है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में बिलों और मीटरों में अनाप-शनाप रीडिंग फीड कर दिये जाने की शिकायत पर पावर कॉरपोरेशन मीटर लगाने का कार्य निजी कम्‍पनियों से वापस लेकर अपने कर्मचारियों से कराने की बात कर तो रहा है, लेकिन इस ओर कदम नहीं बढ़ा रहा है। साथ ही मीटर रीडिंग के नाम पर की जा रही मनमानी की ओर भी किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। 

 

 

40 प्रतिशत उपभोक्ताओं से वसूली नहीं

प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च कर लेसा ने शहरी क्षेत्रों में बिजली बिलों की वसूली के लिए ऑनलाइन बिलिंग केंद्र, ई-सुविधा केंद्र के अलावा बैंक में बिल जमा करने के साथ ही बिलिंग सचल वाहन का संचालन कर रहा है, लेकिन फिर भी 40 फीसदी उपभोक्ताओं से बिलों की वसूली नहीं हो पा रही है। लेसा निजी एजेंसियों को प्रति बिल के नाम पर अच्छा खासा कमीशन भी देता है। बावजूद इसके शत प्रतिशत राजस्व उसे नहीं मिल पा रहा है। 

 

 

उपभोक्ताओं को नहीं मिलता समय से बिल

राजधानी में आधा दर्जन से ज्यादा निजी कम्‍पनियां केवल मीटर रीडिंग का कार्य कर रही हैं। इसके अलावा बिलिंग केंद्रों पर बिलों को जमा करने के लिए निजी कम्‍पनियां लगी हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली का बिल समय से नहीं मिल पाता है। कम्‍पनियां लेसा के अधिकारी खुद मानते हैं कि शत-प्रतिशत रीडिंग न हो पाने की वजह से उसे पूरा राजस्व नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि आये दिन सर्वर में खराबी के चलते बिलिंग केंद्रों पर लगने वाली कतारों की लम्‍बी लाइन कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

 

 

नई व्यवस्था भी साबित नहीं हो रही कारगर

लेसा में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब साढ़े आठ लाख से अधिक वैध उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं को प्रतिमाह बिल जमा करने के लिए लेसा ने शहर के अंदर करीब पांच दर्जन ऑनलाइन बिलिंग केंद्र स्थापित कर रखे हैं। लेसा का दावा था कि ऑनलाइन बिलिंग केंद्रों से उपभोक्ताओं को दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा। इसके बाद लेसा ने ई-सुविधा से हाथ मिलाया। यह भी पूरी तरह बेकार साबित होकर रह गयी है। वसूली बढ़ाने व उपभोक्ताओं को सुविधा देने के लिए लेसा ने बैंक का सहारा लिया, लेकिन बैंक में भी बिजली का बिल जमा हो पाना आसान नहीं रहा। 

 

 

ग्रामीण क्षेत्रों में महीनों बाद मिलते हैं बिल

इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र के आठों ब्‍लॉकों में बक्शी का तालाब व चिनहट में तो ऑनलाइन बिलिंग शुरू करा दी गयी, लेकिन गोसाईगंज, मोहनलालगंज, काकोरी, सरोजनीनगर, माल, मलिहाबाद में आज भी बिलिंग का कार्य पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। यहां पर उपभोक्ताओं के बिल कई महीनों बाद मिलते है। यही वजह है कि उपभोक्ता अपना बिजली बिल नियमित नहीं जमा कर पाते हैं। 

 

 

सर्वर की दिक्कतों से मिलेगी निजात

इस संबंध में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एसपी सिंह ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल जमा करने में असुविधा न हो इसके इंतजाम किये जा रहे हैं। बिलिंग केंद्रों पर सर्वर में आने वाली दिक्कतों से जल्द ही निजात मिल जाएगी। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए राजधानी में सचल वाहन बिलिंग केंद्र की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है।

 

वहीं लेसा मुख्‍य अभियंता आशुतोष कुमार का कहना है कि निजी कम्‍पनियों के कर्मचारियों की आने वाली शिकायतों को लेकर निजी कम्‍पनियों को हिदायत दी गयी है। अगर कोई भी निजी कम्‍पनी का कर्मचारी उपभोक्ता से अवैध पैसों की मांग करता है तो उसकी शिकायत संबंधित डिवीजन या सर्किल में अधीक्षण अभियंता से कर सकता है।

लेसा मुख्‍य अभियंता ने उपभोक्ताओं से मीटर की रीडिंग लेने आने वाले कर्मी का परिचय पत्र देखने की हिदायत दी। वहीं अगर रीडर मीटर खराब बताकर या फिर लोड अधिक बताकर पैसों की मांग करता है तो उसकी शिकायत उपभोक्ता संबंधित डिवीजन में करें। 

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