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आए थे मजदूरी करने फिर अस्पताल में ही कर लिया कब्जा 

Lucknow | 11-Jan-2018 08:50:15 | Posted by - Admin
  • अवैध कब्जेदारों ने कराए कच्चे-पक्के निर्माण

  • अवैध निर्माणों पर मजिस्ट्रेट ने चलवाया बुलडोजर

   
Case of Illegal Construction in Lucknow City

दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ।

 

सर्द रात में कंपकंपा देने वाली ठंड भले ही लोगों को सिहरने पर मजबूर कर रही हो, लेकिन गुरुवार को जिला प्रशासन ने राम मनोहर लोहिया अस्पंताल में अवैध कब्जेदारों को हटाने का अभियान चलाया तो कई लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। हालांकि जिला प्रशासन ने सभी को यहां से हटने के लिए 10 दिन पूर्व नोटिस भी दिया था, लेकिन इसके बाद भी जब यह लोग नहीं हटे तो जेसीबी से तोड़-फोड़ करते हुए सभी को अस्पताल परिसर से खदेड़ दिया गया।

मौके पर मजिस्ट्रेट अमित सिंह, विभूतिखंड थाना प्रभारी सत्येंद्र राय सहित भारी मात्रा में पुलिस और पीएसी बल मौजूद रहा। इस दौरान छिटपुट विरोध भी देखने को मिला।

 

 

 

गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्तन चिकित्सालय के निदेशक डॉ. मेजर डीएस नेगी ने 30 अक्टूबर 2017 को यहां पर रहने वाले अवैध मजदूरों को हटाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने 31 अक्टूबर तक अवैध कब्जेदारों को हटाने की अपील भी की थी लेकिन समय से फोर्स ना मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। इसी बीच मजिस्ट्रेट चतुर्थ अमित कुमार सिंह ने इन कब्जेदारों को 10 जनवरी तक अवैध निर्माण हटाने के लिए चार जनवरी को नोटिस जारी कर दिया। हालांकि किसी ने भी ना तो अवैध निर्माण तोड़ा और ना ही जमीन खाली की। इसके बाद मजिस्ट्रेसट ने गुरुवार को सुबह पुलिस बल के साथ सभी निर्माणों को तोड़ते हुए कार्रवाई की और कब्जेदारों को बाहर का रास्ता दिखाया।

 

 

 

कब्जेदारों में मधु, छोटी, सुजीत, सुदामा, दीपक, पप्पू, मनोज, बेचेलाल, जीवन, अनिल, गीता रावत, नंदलाल गुप्ता, कमलेश, सुनील, चंदन, पप्पू ठेकेदार, सरवन, चांदनी, अखिलेश, शकुंतला, रमाशंकर, कमालुद्दीन, राजू चौहान, सीता, रियाजू, नसीर, नंद कुमार, शमीन बानो, संगीता, सुंदरी, सुरेंद्र, अशोक, सोनेलाल, नरेंद्र वर्मा, कुंदन, राजकुमार और हीरालाल यादव आदि लोग शामिल थे।

 

 

अस्पताल निर्माण के दौरान आए थे-

अस्पताल के डॉक्टर एमएल भार्गव ने बताया कि जिस समय यह अस्पताल बन रहा था उसी समय ये लोग मजदूरी करने यहां आए थे। इसके बाद अस्पताल बनकर तो तैयार हो गया लेकिन किसी ने भी जमीन खाली नहीं की। कई लोगों ने मजदूरी छोड़ दूसरा काम शुरू कर दिया तो कुछ लोग ई-रिक्शा खरीद कर खुद ही काम करने लगे। इसके बाद भी यहां पर पक्का निर्माण भी करा बैठे। कई बार इन्हें हटाने का प्रयास किया गया लेकिन ये लोग अस्पताल प्रशासन पर ही हावी हो जाते थे। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया था। 

 

 

 

विरोध किया तो हवालात भेजा-

जिस दौरान जेसीबी से अवैध निर्माणों को तोड़ा जा रहा था उसी समय एक समाजसेवी ने इस कार्रवाई का विरोध किया। पहले तो वह मजि‍स्ट्रेट अमित सिंह और पुलिस अधिकारियों से सामान्य तरीके से बातचीत कर रहा, लेकिन अचानक ही उसने मजिस्ट्रेट को अत्याचारी बताते हुए कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। इससे कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और चल रही कार्रवाई भी प्रभावित हो गई। हंगामा बढ़ता देख अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेते हुए थाने भेजा और फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।

 

 

 

“यहां पर रह रहे अवैध लोगों को स्वत: ही कब्जा हटाने के लिए चार जनवरी को नोटिस जारी किया गया था। इस दौरान किसी को कोई दिक्कत हो तो उन्हें अपील करने का समय भी मिला। हालांकि 10 जनवरी तक कोई भी कब्जेदार कोर्ट में नहीं आया और ना ही किसी माध्यम से अपनी समस्या को रखा। इतना ही नहीं बीते बुधवार को मौके पर पुलिस को भेजकर उन्हें स्वत: हट जाने का मौका भी दिया गया, लेकिन एक भी कब्जेदार ने अपना सामान नहीं हटाया। इसके बाद गुरुवार जेसीबी मंगा कर सभी कच्चा-पक्का अवैध निर्माण तोड़ दिया गया।”

अमित कुमार सिंह

मजिस्ट्रेट-4

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