Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

चौक हो या फिर निराला नगर या फिर ठाकुरगंज स्थित सराय माली खां। अवैध निर्माणों का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। एलडीए भी कार्रवाई का दम तो भर रहा है लेकिन जिन्हें इन पर अंकुश लगाना है उनके भ्रष्ट आचरण के चलते अवैध निर्माण दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बड़े होते जा रहे हैं। पूर्व सचिव की निष्क्रियता के बाद एलडीए के सचिव एमपी सिंह ने एक बार फिर पुराने लखनऊ सहित राजधानी में हो रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई करनेका  दावा किया है।

 

क्षेत्रीय अभियंताओं की सांठगांठ का नतीजा है कि हेरीटेज जोन के आसपास ही कई बहु मंजिला भवन बनकर तैयार होने को हैं। घंटाघर के सामने स्थित नजूल की जमीन पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण ही नहीं हुए बल्कि उसमें बैट्री रिक्शा शोरूम से लेकर अन्य दुकानें तक खुल गईं। जबकि प्रशासन और एलडीए सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने का अभियान चलाने में व्यस्त हैं। कार्रवाई करने की बात तो दूर रही अभियंताओं ने क्षेत्र का निरीक्षण तक करना उचित नहीं समझा। पुरानी कार्यप्रणाली की सुस्‍ती में डूबे अभियंता अभी भी अपनी मनमानी करने पर उतारु हैं। यही कारण है कि अवैध निर्माण करा रहे बिल्‍डरों को नए अधिकारी आने का झांसा देते हुए अवैध वसूली पर जुट गए हैं।

हरदोई रोड़ स्थित सरॉय माली खां में ढ़ाल के नीचे बेहद ही संकरे मार्ग पर बेसमेंट खोदकर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण के संरक्षक खुद अवर अभियंता रवींद्र श्रीवास्‍तव ही हैं। बीते दिनों तत्‍कालीन सचिव जय शंकर दुबे ने उन्हें यहां पर कार्रवाई के आदेश दिए तो उन्‍होंने कोई एक्‍शन ही नहीं लिया। इसके बाद निर्माण कराने वाले से सेटिंग करते निर्माण कार्य की छूट दे दी। हालांकि ना तो यहां का नक्‍शा पास हुआ और ना ही अन्‍य जरूरी कार्रवाई हुई। यह हाल कोई एक जगह का नहीं है बल्कि चौपटिया में और घंटाघर के पास भी बहुमंजिला इमारते बन कर तैयार हो गईं लेकिन अवर अभियंता सहित अन्‍य अधिशासी अभियंता तक को इसकी जानकारी नहीं हो पाई। चौक कोतवाली के बगल में बेहद ही संकरे रास्‍ते पर बेसमेंट खोद कर निर्माण किया जा रहा है लेकिन किसी ने भी एक बार भी यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि यह निर्माण किस आधार पर हो रहा है।

अवैध निर्माण का गढ़ नादान महल मार्ग-

 

चौक और ठाकुरगंज का क्षेत्र नादान महल मार्ग अवैध निर्माण के लिए सेफ जोन बन गया। सिद्धनाथ मंदिर से लेकर नादान महल मस्जिद तक अवैध निर्माण हुए। कई बार इनकी शिकायत भी हुई और पूर्व वीसी सत्‍येंद्र सिंह ने काम रोकने के साथ ही सील करने का आदेश भी दिया लेकिन प्राधिकरण के कर्मठ अभियंता एक बार भी कार्रवाई की जहमत नहीं उठा पाए। इन्‍हीं सबका कारण रहा कि नख्‍खास चौकी से लेकर नादान महल मार्ग तक 10 से अधिक अवैध निर्माण हुए। इन सभी पर रेट तय करते हुए वसूली की गई और इसी कारण आज तक इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

सुभाष मार्ग के निर्माणों पर पर्दा-

 

इतना ही नहीं प्राधिकरण के वरिष्‍ठ अभियंता ने सुभाष मार्ग में हो रहे अवैध निर्माण की फोटोग्राफी+वीडियोग्राफी की। 50 पेज की इसकी फाइल भी तैयार की गई। बेसमेंट, पार्किंग से लेकर पूरे निर्माण तक के एक-एक  बिंदु को लिखा गया लेकिन फाइल ही गायब हो गई। इसी के साथ निर्माण पर कार्रवाई की बात तो दूर फाइल खोजना ही टेढ़ी खीर बन गई जो आज तक नहीं मिली।

हेरिटेज जोन की सीलिंग पर खुली दुकान-

 

घंटाघर के हेरिटेज जोन में शुमार मच्‍छी भवन के पास एक अवैध निर्माण कराया गया था। यह निर्माण होने के पहले ही कई बार सील हुआ और कई बार काम भी रूका ले‍किन अभियंता के साथ हुई डीलिंग ने हर बार नियमों को ताख पर कर दिया। जब यह बनकर तैयार हो गया तो एक बार फिर इसे सील कर दिया गया। इसके कुछ ही दिन बाद यहां पर चिकनकारी की दुकान खुल गई। यहां पर भी जेई ने अपनी हनक बरकरार रखी और सचिव द्वारा भेजी गई दो बार की नोटिस का जवाब आज तक नहीं दिया।

एक साथ बन गईं 150 दुकानें-

 

चौक से बाजारखाला थाने की ओर जाने वाले मार्ग पर एक बहुमंजिला इमारत बन रही है। फिलहाल यहां पर 150 से अधिक दुकानें बनकर तैयार हो गई हैं। इसमें डाग्‍नोस्‍टिक से लेकर तरह-तहर की दुकानें भी खुलीं हैं। तीन ओर से बन रही इस इमारत में चौथी मंजिल पर भी काम शुरू हो गया लेकिन अभी तक सुरपरवाइजर से लेकर अभियंताओं तक को जानकारी ही नहीं हो पाई।

नए अधिकारी आते ही बढ़ते हैं रेट-

 

नए सचिव या वीसी आने के बाद अवैध निर्माणों का रेट भी अपग्रेड होता है। यह अधिका‍री के मूड के हिसाब से तय किया जाता है। इसका निर्धारण सुरपरवाइजर और अवर अभियंता अपने स्‍तर पर ही कर लेते हैं। इन्‍हीं में एक नाम है ठाकुरगंज क्षेत्र के अवर अभियंता रवींद्र श्रीवास्‍तव का। ऐसे ही अभियंता पहले अधिकारी का बैकग्राउंड, मूड और कार्रप्रणाली को समझते हैं और फिर उसी के अनुसार रेट तय करते हैं। अधिकारी तेज और नियम-कानून वाले हुए तो रेट भी तेजी से बढ़ते हैं और सामान्‍य ढर्रे वाले अधिकारी होने पर चालू रेट पर ही वूसली  जारी रहती है। प्राधिकरण के यही कर्मचारी अवैध निर्माण करने वाले को बताते हैं कि अधिकारी मैनेज नहीं हो रहे इसलिए रेट बढ़ा रहे हैं। कई बार इसकी शिकायत तक उच्‍च अधिकारियों तक पहुंची भी है लेकिन बड़ी कार्रवाई आज तक नहीं हुई। 

“अवैध निर्माण पर सख्‍त कार्रवाई होगी। इसके लिए अधिशासी अभियंताओं से लेकर अवर अभियंताओं तक को आदेश दिया जा चुका है। क्‍योंकि कोई भी अवैध निर्माण दो चार सप्‍ताह में बनकर तैयार नहीं हो जाता है। इसलिए यदि कोई यह कहे कि उसे जानकारी नहीं थी तो यह असंभव है। बातों से नहीं काम करके दिखाना होगा। अन्‍यथा कार्रवाई के लिए तैयार र‍हें।”

मंगला प्रसाद सिंह

एडीए सचिव

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