Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ।

 

राजधानी के चारबाग स्टेशन के पार्सलघर पर हर हफ्ते करोड़ों रुपये की सेटिंग का खेल चल रहा था। क्या वाणिज्यकर विभाग और क्या जीआरपी–आरपीएफ। स्टेशन पर सक्रिय एजेंटों ने इन सबको सुविधाशुल्क की डोर में पिरो रखा था। केवल इतना ही नहीं, चारबाग से लेकर यहियागंज तक बैठे कई दबंग व्यापारी भी रेलवे के जरिए हो रही टैक्सचोरी में हिस्सा खा रहे थे। हर हफ्ते स्टेशन के बाहर ही करोड़ों रुपये की सेटिंग का खेल चल रहा था। इसमें पुलिस से लेकर जीआरपी के कर्मी तक हजारों रुपये पा रहे थे। इसके अलावा माल के स्टेशन के निकलवाने में कई दबंग व्यापारी भी फायदा उठा रहे थे। करोड़ों के सुविधा शुल्क की बंदरबांट के कारण पूरे खेल को निर्विध्न चलाया जा रहा था।

पार्सलघर से बाहर बाजार तक माल पहुंचाने के लिए ट्राली, डाला से लेकर वाणिज्यकर अधिकारी, पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ सहित अन्य लोगों का पूरा सिंडीकेट सक्रिय था। यानी वैगन से माल बाहर निकलते ही इसकी लोडिंग करके कुछ ही समय में बाहर कर दिया जाता था। पूरा खेल दो दशक से अधिक समय से व्यवस्थित ढंग से चल रहा था। गत वर्ष गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगने के बाद रेलवे में बिना किसी रोक–टोक हो रही ढुलाई प्रभावित होने लगीं। नए नियम–प्रावधान के चक्कर में दूसरे राज्यों से रेल के जरिए माल की आमद कम हो गई। ऐसे में यहां पर चल रहे काकस ने तमाम लोगों को काम न होने की दलील देने लगे। इसे लेकर सिंडीकेट में आपसी सहमति तल्खी में बदल गई।

दूसरी तरह कई व्यापारी नेताओं की भी आमदनी बंद हुई तो उनका विरोध भी वाणिज्य कर दफ्तर तक पहुंच गया। यही मुखबिरी के चलते पिछले दिनों चारबाग स्टेशन पर रेड हुई और उसके बाद पांच करोड़ से ज्यादा माल पकड़ लिया गया।

शोरूम से ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक तक हो गए एजेंट

चारबाग रेलवे स्टेशन के पार्सल घर के सक्रिय एजेंट व्यस्त बाजारों में ट्रांसपोर्ट कंपनी, शोरूम तथा होटल तक के मालिक बन चुके हैं। चारबाग में ही सुभाष मार्केट के आसपास बने तमाम लाज–होटल से लेकर बांसमंडी, ऐशबाग व आर्यनगर में तमाम घरों को गोदाम में तब्दील कर लिए गए। पार्सलघर से निकलते ही सारा टैक्सचोरी का माल स्टेशन से दो-तीन किमी के दायरे में ही गोदामों–होटलों में पहुंच जाता और फिर उसे सुरक्षित बाजारों तक पहुंचा दिया जाता है। हालांकि अब जांच के बाद कई एजेंट व उनकी फर्में कामर्शियल टैक्स विभाग के निशाने पर आ चुके हैं।  

विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ

खास बात यह है कि जीएसटी लगने के बाद चारबाग स्टेशन पर तैनात एजेंट व अधिकारियों के बीच सांठगांठ ज्यादा हो गई थी। दरअसल, जीएसटी के प्रारंभिक चरण में जांच को शिथिल कर दिया गया था। इस कारण से जीएसटी लगने के कुछ समय बाद ही रेलवे से आने वाली माल की मात्रा कहीं ज्यादा बढ़ गई थी। इसमें स्टेशन पर तैनात होने वाली जांच इकाईयां व एजेंट की जेब भर रहे थे, जबकि बाकी लोगों को माल की आमद न होने की जानकारी देकर पल्ला छुड़ाया जा रहा था। आखिर में यही मतभेद इस पूरे सिंडीकेट पर हमले का सबब बन गया।

"चारबाग स्टेशन से टैक्सचोरी के माल को जब्त कर उसकी जांच की जा रही है। इसमें विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है। जो भी दोषी मिलेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। पूरे प्रदेश में रेलवे स्टेशनों की निगरानी कराई जा रही है।"

एके सिंह

अपर आयुक्त (कामर्शियल टैक्स ग्रेड टू)

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