Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

एक निजी प्रतिष्‍ठान में कार्यरत शुभम को मंगलवार की सुबह आधार कार्ड का ओटीपी मिला तो वह चौंक गए। कारण यह था कि उनका आधार कार्ड पहले ही बन चुका था। ये बात उनके भी समझ में नहीं आ रही है कि आखिर उनके आधार कार्ड के लिए आवेदन किसने किया। ये केवल उदाहरण भर है ऐसे तमाम लोग हैं जो इससे परेशान हैं। पिछले दिनों फर्जी आधार कार्ड का मामला सामने आने के बाद लोगों का परेशान होना भी स्‍वाभाविक है।

 

 

दरअसल आपका आधार कार्ड असली है या नकली यह जान पाना लगभग आसान नहीं है। यह हम नहीं बल्कि अपर जिला विज्ञान अधिकारी विनय चौहान कह रहे हैं। बीते दिनों एसटीएफ ने क्‍लोनिंग के जरिए आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के 10 हैकरों को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था। इसके बाद से ही यह प्रश्‍न उठ खड़ा हुआ था कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड है वह असली है या नकली। हालांकि एसटीएफ ने असली-नकली के पहचान पर गेंद को यूआइडीएआइ के पाले में डालते हुए पल्‍ला झाड़ लिया था।

 

 

सरकारी योजनाओं सहित तमाम कार्यों में काम आने वाले आधार कार्ड की पहचान पर प्रश्‍नचिन्‍ह लग गया है, क्‍योंकि जिन एजेंसियों को अधिकृत डीलर के रूप में चुना गया था उनमें से कुछ लोगों ने इसमें बड़ी हेरफेर करते हुए तमाम फर्जी कार्ड बना डाले। हालांकि इन्‍हें पहचानना आसान नहीं है, क्‍योंकि कहीं पर सॉफ्टवेयर हैकिंग के साथ अधिकृत डीलर के अगूंठे की क्‍लोनिंग करते हुए आधार कार्ड बनाए गए तो कहीं पर रेटिना किसी का चेहरा किसी का और फिंगर प्रिंट किसी का करते हुए कार्ड बनाने में खेल किया गया।

कम समय में अधिक रुपये कमाने के लालच में इन डीलरों ने नियम-कानून की खूब धज्जियां उड़ाईं और मोटा मुनाफा कमाया। यूआइडीएआइ के कड़े सुरक्षा मानकों में सेंध लगाते हुए हैकरों ने बड़े स्‍तर पर ऐसे आधार कार्ड जारी करवा लिए थे। 

 

 

अभी चल रही जांच

एसटीएफ ने कानुपर से 10 आरोपियों को गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन हैकर्स का मास्‍टर माइंड अभी भी फरार है। इस मास्‍टर माइंड ने ऐसा एप्‍लीकेशन तैयार किया था कि यूआइडीएआइ के सुरक्षा तंत्र को ध्‍वस्‍त करते हुए अधिकृत डीलर के क्‍लोनिंग अगूंठे से किसी का भी कहीं से भी आधार कार्ड तैयार कर सकते हैं। मास्‍टर मांइड ने इस एप्‍लीकेशन को पांच-पांच हजार रुपये में धड़ल्‍ले से बेंचा। इससे जिले या प्रदेश में कहीं से भी बैठ कर ऑपरेट किया जा सकता था। अब इनकी वास्‍तविक संख्‍या कितनी है इसके बारे में एसटीएफ के पास भी कोई जानकारी नहीं है।

 

 

“आधार कार्ड असली है या नकली यह कह पाना सरल नहीं है, क्‍योंकि अधिकृत एजेंसी धारक के क्‍लोनिंग अगूंठे से बनाए गए आधार कार्ड को तब तक नकली नहीं कहा जा सकता जब तक कि इसका खुलासा न हो। हैकर्स बेहद ही शार्प माइंड के खतरनाक अपराधी होते हैं। इसलिए सॉफ्टवेयर जैसी कोई भी चीज हैक करना उनके लिए बड़ा आसान है।”

विनय चौहान

अपर जिला विज्ञान अधिकारी‍

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