Home Lucknow News Case Of Dust And Raw Materials In Lucknow City

पाकिस्तान के साथ टेस्ट क्रिकेट की सीरीज खेलने के पक्ष में नहीं हैं सरकार: सूत्र

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर कल BCCI के अधिकारियों से करेंगे मुलाकात

फिल्म पद्मावती रिलीज मामले पर SC में 28 नवंबर को होगी सुनवाई

हाफिज सईद की रिहाई बहुत गलत है: हंसराज अहीर

दिल्ली: पीएम मोदी ने साइबर स्पेस सम्मेलन का उद्घाटन किया

कबाड़ मशीनों से कूड़े की प्रॉसेसिंग

Lucknow | 08-Nov-2017 17:20:30 | Posted by - Admin
  • दो तिहाई खत्म हुआ कूड़े की डंपिंग
  • नई मशीने लगाकर होगी प्रॉसेसिंग
   
Case of Dust and Raw Materials in Lucknow City

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

सरकार की प्राथमिकता सूची में सफाई का मुद़दा भले ही जुड़ा है, लेकिन शिवरी प्लांट की कबाड़ मशीने कूड़े की प्रॉसेसिंग में सबसे बड़ी बाधा बनी है। सीऐंडडीएस की मेहरबानी के चलते ज्योति एन्वायरोटेक की घटिया कार्यशैली नई एजेंसी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है। हाल यह है कि आरडीएफ (रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल) ब्रिक्स बनाने वाली मशीन हर छह घंटे में सर्विसिंग मांगती है तो, कंपोस्ट बनाने वाली यूनिट की मशीन हर दो घंटे में बंद करनी पड़ती है। यह कंपोस्ट भी सही से नहीं बना पा रही है। अधिकारियों ने 50 हजार टन कूड़े को छांटा जरूर है, लेकिन अभी भी 10 हजार टन से ज्यादा कूड़ा डंप है।

20 दिन में खत्म हो पाएगा कूड़े का बैकलॉग

 

अभी भी यहां पर 10 हजार टन से ज्यादा कूड़ा डंप पड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक 1300 टन की प्रॉसेसिंग की प्रक्रिया में अभी 18 से 20 दिन लगेंगे। इसके बाद ही शहर के पूरे कूड़े को प्लांट पर भेजा जा सकेगा। अभी 300 से 400 टन के बीच ही कूड़ा प्रॉसेस के लिए ले जाया जा रहा है।

खटारा मशीनो ने बढ़ाई मुश्किल

 

प्लांट पर ओडीएफ बनाने वाली यूनिट की मशीन हर 8 घंटे में सर्विस करानी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक यह इससे पहले मशीन कभी चली ही नहीं। अब गैसीफायर बायोमास को चलाने के लिए आरडीएफ ब्रिक्स की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में इसका इस्तेमाल जरूरी है। बताया कि इसके स्पेयर भी नहीं मिल रहे हैं। बड़ी मुश्किल से इसे चलाया जा रहा है।

 

कंपोस्ट यूनिट

 

कंपोस्ट यूनिट में कंपोस्ट की पैकिंग जनवरी में हुई है। वह भी अफसरों को दिखाने के लिए ज्योति एन्वायरोटेक की ओर से करवाई गई थी। अभी तक यहां पर कंपोस्ट पैक कर किसी खाद कंपनी को भेजा नहीं गया है। ईकोग्रीन एनर्जी खाद की गुणवत्ता खराब है क्योंकि मशीन कबाड़ हो चुकी है। इसमें पॉलीथीन या कंकड़ रह जा रहा है। बताया कि इसके लिए बैलेस्टिक सेपरेटर मंगाया जा रहा है। मई के आखिर तक कंपोस्ट के सैंपल की टेस्ट रिपोर्ट और कंपोस्ट का उत्पादन ठीक से शुरू कर दिया जाएगा। अभी 20 टन तक ही खाद का उत्पादन हो रहा है।

सेग्रीगेशन यूनिट

 

मौके पर सेग्रीगेशन यूनिट चलती पाई गई, दो मशीने कूड़ा छांट भी रही थी। नीतेश के मुताबिक छोटे कंकड़-पत्थर पुरानी मशीन नहीं छांट पा रही है। इससे दिक्कत आ रही है। इससे पहले यहां पर बैलेस्टिक सेपरेटर भी लगाया जा रहा है। जिसके लिए बेस बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। जिससे कंकड़, पत्थर और दूसरी अनुपयोगी चीजें छंट जाएंगी।

“प्लांट हैंडओवर के समय यहां पर काफी मुश्किल थी। स्थिति यह थी कि यहां पर 60 हजार टन से ज्यादा कूड़ा डंप था। अब इसकी प्रॉसेसिंग करते-करते 10 हजार टन से थोड़ा ज्यादा कूड़ा बचा है। इसे भी 18-20 दिन तक हटा लिया जाएगा। मशीने और गाडिय़ां कंडम हो चुकी हैं, हम नई मशीने मंगा रहे हैं। मई के आखिर तक प्लांट पर पूरे शहर का कूड़ा लेना शुरू कर देंगे।”

नीतेश तिवारी, जीएम

ईकोग्रीन एनर्जी

 

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555



संबंधित खबरें



HTML Comment Box is loading comments...

Content is loading...




TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll


What-Should-our-Attitude-be-Towards-China


Photo Gallery
गोमती तट पर दीप आरती करती महिलाएं। फोटो- अभय वर्मा



Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news


sex education news