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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

शहर के बाजारों को चमकाने के लिए शुरू की गई रात्रि कालीन सफाई व्यवस्था में भ्रष्टचार शुरू हो गया है। नगर निगम की ओर से बाजारों की सफाई के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन बाजारों में रात्रि कालीन सफाई नहीं हो रही है। शहर में एक ही नहीं बल्कि सभी बाजारों की सफाई व्यवस्था चौपट है। इससे लोगों और दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

कार्य तो कार्यदायी संस्‍था को दे दिया गया है, लेकिन निगम अधिकारी भी चुप्‍पी साधे हुए हैं। निगम अफसरों की इस तरह की चुप्‍पी कार्यदायी संस्‍था के न सफाई किए जाने के कारनामों को तो बल दे ही रहा है, साथ ही कहीं न कहीं भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा देना है।

 

 

शहर के निशातगंज बाजार की बात करें तो यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त पड़ी है। बाजार में गंदगी का अंबार लगा है। रात में सफाई न होने के कारण यहां जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। बाजार के हालात इस कदर चौपट हैं कि यहां के व्यापारी खुद के खर्च पर सफाई कराने को तैयार हैं। कुछ दुकानदारों ने बताया कि उनकी ओर से निजी सफाईकर्मी लगाये गए हैं। नगर निगम की ओर से कोई सफाई नहीं की जा रही है।

 

 

निशातगंज की सफाई के लिए कार्यदायी संस्था को 10 कर्मचारियों का वेतन दिया जा रहा है। संस्थाओं को प्रति व्यक्ति के हिसाब से 7500 रुपये भुगतान किया जा रहा है, फिर भी बाजार गंदगी से पटा पड़ा है। ऐसे में सफाई के नाम पर जारी किया गया करोड़ों का बजट कहां जा रहा है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इस कार्य की जिम्‍मेदारी संभाल रहे पर्यावारण अभियंता का कहना है कि निशातगंज में सफाई न किए जाने की शिकायत मिली है। संस्था मालिक क्षेत्रीय सफाई निरीक्षक का फोन भी नहीं उठाता है। 

 

 

"सफाई के साथ समझौता नहीं होगा। काम न करने वाली कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई होगी"

उदयराज सिंह

नगर आयुक्त

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