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कमीशनखोरी में उपभोक्ताओं का शोषण

Lucknow | 05-Dec-2017 12:30:45 | Posted by - Admin
  • कमीशन के मीटर बढ़ा रहे हैं उपभोक्ताओं का दर्द
  • गोमतीनगर में उपभोक्ता की एक महीने में रीडिंग हो गई 43 लाख यूनिट
   
Case of Corruption in Lucknow Electricity Department with Electricity Meter

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

कमीशन की खातिर बिजली विभाग उपभोक्ताओं का शोषण करने में जरा भी बाज नहीं आ रहे हैं। केवल कमीशन के आधार पर मीटर की खरीद होती है। उसके बाद मीटर की सारी गड़बड़ी उपभोक्ता के सिर। उपभोक्ता को गलत साबित करने के लिए लेसा भी सारी जुगत लगा डालता है। सवाल यह है कि बाजार में बिजली का एक बल्ब भी बिकता है तो उस पर एक समयावधि की गारंटी रहती है। बशर्ते वह बल्ब टूटे नहीं। मगर लेसा के साथ ऐसा कुछ नहीं है।

 

 

 

दरअसल, यह बात वैसे ही नहीं है, पिछले दिनों गोमतीनगर विस्तार स्थित ग्रीन बुड अपार्टमेंट में रहने वाली एक उपभोक्ता के घर पर बिजली मीटर की रीडिंग करीब 42 लाख 94 हजार यूनिट दर्ज की गई। जबकि करीब छह महीने पुराने कनेक्शन औसतन सौ यूनिट का बिल आ रहा था। रीडिंग इतनी देख मीटर रीडर भी भाग खड़ा हुआ। परेशान उपभोक्ता ने इसकी शिकायत  ऊर्जा मंत्री से की तो वहां से जांच के आदेश दे दिए गए हैं लेकिन देखने वाली बात यह है कि आखिर इसमें होता क्या है।

 

 

अब जरा गौर कीजिए, बिजली विभाग उपभोक्ता के घर जो मीटर लगा रहा है। उसकी वैसे को पांच –साढ़े पांच साल की गारंटी बताई जाती है लेकिन यह गारंटी मीटर खरीदने वाली तिथि से लागू होती है। खरीद की तमाम प्रक्रिया के बाद मीटर उपभोक्ता के घर कब लग रहा है, इससे लेसा से कोई सरोकार नहीं रहता है। यही नहीं, इसमें कई वह कंपनियां मीटर की सप्लाई कर रही है, जो पूर्व में ब्लैक लिस्ट हुईं थी लेकिन पूर्व कार्पोरेशन प्रबंधन ने इन्हीं को फिर आपूर्ति का जिम्मा सौंप दिया। सूत्रों के मुताबिक अब कंपनियां चीन निर्मित मीटर लगा रही है और उनके बारे में मीटर विभाग के अभियंता भी ज्यादा कुछ नहीं बता पाते हैं। मीटर जंप करने के मामलों में भी लेसा में जांच बहुत संदिग्ध होती है।

 

 

पांचवी फेल जांच रहे हैं मीटर

मीटर में गड़बड़ी के नाम पर उपभोक्ता पर हर तरह की जुर्माना लगाने को तैयार लेसा अभियंताओं की मेहरबानी से पांचवी फेल लोग लोगों के मीटर जांच रहे हैं। खास बात यह है कि जब कभी इसकी शिकायत होती है तो अभियंता उन्हें संविदा कर्मचारी करार दे देते हैं, जबकि उपभोक्ताओं के शोषण में इन्हीं अनपढ़ लोगों की रिपोर्ट को आधार बना दिया जाता है। सबसे ज्यादा खेल मीटर नो डिस्प्ले या आइडीएफ होने पर होता है।

 

 

नियमानुसार आइडीएफ होने पर उपभोक्ता पर प्रति किलोवाट 155 यूनिट चार्ज करने का प्रावधान है। अन्यथा पूर्व में मीटर ठीक रहने की स्थिति में जो औसत खपत होती है, उतना बिल बनता है। मगर लेसा में आईडीएफ का खेल भ्रष्टाचार का रूप ले चुका है। इसकी आड़ में अभियंता से लेकर ठेकेदार उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं। जबकि गांरटी अवधि में मीटर नो डिस्प्ले होने पर उसे तत्काल बदले जाने का प्रावधान है।

 

 

"बिजली के मीटरों की पांच व साढ़े पांच साल की गारंटी खरीदने की अवधि से रहती है। यह गारंटी बोर्ड के लिए होती है। इस दौरान मीटर बिगड़ने पर उसे बिना किसी मूल्य के बदला जाता है। ऐसे में किसी उपभोक्ता को संदिग्ध नहीं माना जा सकता है। मीटर टेंपरिंग होने की दशा में उस पर जुर्माना या विद्युत चोरी में आरोपित किया जाता है।"

आरएन सरोज

अधिशासी अभियंता मीटर

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