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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राजधानी की लाइफ लाइन कही जाने वाली गोमती नदी के सफाई के लिए पिछले दिनों खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उतरे थे। तमाम संगठनों के साथ श्रमदान किया गया और गोमती को स्वच्छ निर्मल करने के लिए संकल्प लिया गया। मगर मुख्यमंत्री के इन प्रयासों को दरकिनार करते हुए सिंचाई विभाग ने गोमती सफाई के लिए आए करोड़ों के ड्रेजर घाघरा नदी की सफाई के लिए भेज दिए हैं।

खास बात यह है कि ड्रेजर का इस्तेमाल राजधानी में न के बराबर हुआ और अब उन्हें घाघरा की सफाई के लिए भेज दिया गया है, लेकिन इस बावत सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

दरअसल, गोमती नदी की सफाई के लिए ड्रेजर मंगाए गए थे। पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के समय जनता के अरबों रुपये खर्च कर गोमती रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया था। इसके तहत गोमती की सफाई तथा तटों का सौंदर्यीकरण किया जाना था। इसके लिए ड्रेजर भी मंगाए गए थे। हालांकि, सरकार जाते ही रिवर फ्रंट को लेकर तमाम विवाद खड़े होने लगे थे। इसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगे और जांच भी चल रही है। मगर करोड़ों रुपये खर्च कर मंगाए गए उपकरण धूल फांक रहे हैं। नदी में खुले नाले गिर रहे हैं। सफाई की व्यवस्था भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री द्वारा गोमती सफाई को लेकर की गई शुरुआत के बाद गोमती के स्वच्छ होने की कुछ उम्मीद बंधी थी, लेकिन एक बार फिर इनकी हवा निकलती दिख रही है। नदी की सफाई के लिए आए ड्रेजर भी बाहर भेज दिए गए हैं। ऐसे में गोमती कितना साफ होगी, इस पर सवाल उठना लाजिमी है।

 

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